कॉकरोच पार्टी कोई मज़ाक नहीं

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भारत में युवा तिलचट्टों का पर्याय बनकर सिस्टम से नाराजगी जता रहे हैं। 'कॉकरोच जनता पार्टी' के रूप में उठी इस सुनामी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। यह युवा वर्ग की बेरोजगारी, महंगाई और लचर सरकारी तंत्र से उपजी हताशा का प्रतीक है।

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कॉकरोच या तिलचट्टे इंसानों की दृष्टि में सृष्टि के सबसे घृणित जीवों में से एक हैं। लेकिन, आज भारत में हजारों की संख्या में युवा वर्ग 'मैं भी कॉकरोच' जैसे हैशटैग, मीम्स और बैनरों के जरिए अपने आप को तिलचट्टों का पर्याय बताने में गर्व महसूस कर रहा है। सोशल मीडिया के अथाह समंदर में मात्र एक हफ्ते में ' कॉकरोच जनता पार्टी ' के रूप में ऐसी सुनामी उठी, जिससे राजनीतिक गलियारों में हर कोई हैरान है।

CJI की टिप्पणी । 'कॉकरोच जनता पार्टी' का उदय CJI सूर्यकांत की 15 मई को एक केस की सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणी के कुछ घंटों बाद हुआ। चीफ जस्टिस ने अगले दिन अपनी बात स्पष्ट की, लेकिन बेरोजगारी से बेचैन युवाओं पर इससे कोई फर्क पड़ा नहीं। बोस्टन में पढ़ रहे 30 वर्षीय अभिजीत दीपके की 'कॉकरोच जनता पार्टी' दिलों में एक आग लगा चुकी थी।

दलों को चुनौती । 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने मात्र एक हफ्ते के भीतर इंस्टाग्राम पर 22 मिलियन से ऊपर फॉलोअर्स जुटा लिए, BJP और कांग्रेस से भी ज्यादा। ऐसे में इस पार्टी को लेकर परंपरागत राजनीतिक दलों में बेचैनी स्वाभाविक है। यह बेचैनी सोशल मीडिया पर भी दिख रही। BJP के कट्टर समर्थक इसे विपक्ष का विदेश से चलने वाला टूलकिट बताने में लगे हुए हैं। वहीं, कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर इसे BJP की ही 'बी' टीम के रूप में पेश कर रहे हैं।

ब्लॉक बेअसर । BJP विरोधियों का तर्क है कि दीपके पहले AAP से जुड़े हुए थे। आम आदमी पार्टी पर भी BJP की 'बी' टीम होने का आरोप लगता रहा है। इस बीच 'कॉकरोच जनता पार्टी' का ट्विटर अकाउंट एक बार बंद किया जा चुका है। दीपके का आरोप है कि उनकी वेबसाइट भी बंद कर दी गई थी और इंस्टाग्राम हैक हो चुका है। हालांकि इससे CJP की लोकप्रियता पर असर नहीं पड़ा। लाखों लोग उनके नए अकाउंट से जुड़ गए।

सिस्टम से नाराजगी । CJP का उदय युवा वर्ग की सिस्टम से नाराजगी का उफान है। लेकिन, यह उफान अभी ही क्यों आया? क्यों युवा वर्ग की इस तरह अपने आपको नीचा दिखाने की रणनीति इतना कामयाब हो रही है? एक लंबे समय से युवाओं के अंदर बेरोजगारी, महंगाई, लचर सरकारी स्वास्थ्य-तंत्र, महंगी शिक्षा व्यवस्था और गिरती अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर कसमसाहट है। ऐसे में NEET के पेपर लीक और परीक्षा निरस्त किए जाने के चंद दिनों बाद ही आए कॉकरोच वाले बयान ने आग में घी डालने का काम किया। इस मुहिम के समर्थकों का कहना है कि कॉकरोच सिस्टम में लगी दीमक का सफाया कर देंगे।

कम हिस्सेदारी । भारत में औसत उम्र 27 साल है। जापान में यह 50 साल, चीन में 42 और अमेरिका में 40 साल है। लेकिन, देश में नीति निर्धारण के मामलों में युवाओं का प्रतिनिधित्व जनसंख्या में उनके अनुपात के एकदम विपरीत है। ADR की एक रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा केंद्रीय सरकार में सिर्फ 24% मंत्री 31 से 50 वर्ष आयु वर्ग के हैं। यानी तीन चौथाई से भी ज्यादा मंत्री 50 साल के पार। लेकिन, हमारे देश में 55-60 साल के व्यक्ति को भी राजनीति में युवा माना जाता है। समय बहुत तेजी से बदल रहा है, खास तौर पर संचार क्रांति और सोशल मीडिया के आने के बाद। ऐसे में भारत जैसे देश को कॉकरोच जनता पार्टी के उदय को समझने की जरूरत है।

कॉकरोच ही क्यों । डायनासोर से भी पुरानी कीड़ों की इस प्रजाति का GenZ के लिए हथियार बनना सिस्टम के खिलाफ लड़ाई का एक महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक पहलू है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' के खिलाफ 'हिट जनता पार्टी' जैसे संगठन बन गए हैं। लेकिन, कॉकरोच करोड़ों बरसों से जिंदा हैं और आसानी से मरते नहीं, इस बात पर युवा वर्ग का बड़ा तबका जोर दे रहा है।

अप्रत्याशित समर्थन । यक्ष प्रश्न है कि यह मुहिम कितने दिन चलेगी और सिस्टम में कोई बदलाव ला पाएगी या नहीं? सुनियोजित न होने के बावजूद इस मुहिम को सहज रूप से अप्रत्याशित समर्थन मिल रहा है। इसके मैनिफेस्टो में कुछ बिंदु बहुत क्रांतिकारी हैं - जैसे किसी भी सांसद-विधायक का पार्टी बदलने पर चुनावों से 20 बरस का निष्कासन या किसी भी वैध वोटर का नाम लिस्ट से हटाने पर CEC की UAPA के तहत गिरफ्तारी। ऐसे असंभव लगने वाले बिंदु ही युवा वर्ग को आकर्षित कर रहे हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पड़ोसी मुल्क नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में युवा वर्ग के आक्रोश की बदौलत ही ऐसा बदलाव आया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)