सौरभ श्रीवास्तव
देश के हालात को देखते हुए अपन ने पेट्रोल वाली कार और इलेक्ट्रिक स्कूटी, दोनों ले रखी हैं, लेकिन इस वक्त दोनों काम नहीं आ रहीं। कार में पेट्रोल भरवाता हूं तो लगता है कि देशभक्ति कुछ कम हो रही है। बिजली आ नहीं रही तो स्कूटी चार्ज नहीं हो पा रही। कई दिन से कहीं नहीं गया। लग रहा है घर में रहने के बजाय स्थापित न हो जाऊं। जीवन इतना स्थिर हो गया है कि कई बार पृथ्वी का घूमना भी महसूस होने लगा है।
एक रोज पत्नी कहने लगी, 'दिन भर पड़े रहते हो, बीमार हो जाओगे।' मैंने कहा, 'ऊर्जा बचा रहा हूं। पेट्रोल और बिजली के साथ शरीर की ऊर्जा बचाने को भी देशभक्ति माना जाएगा।' मैं यह कह ही रहा था कि देखा कमरे की छत पर रेंग रही छिपकली भी रुक गई। हम दोनों काफी देर तक एक-दूसरे को एक ही ऐंगल पर देखते रहे। करीब दो घंटे तक ऊर्जा बचाने के बाद मैंने नजर फेरी तो कॉकरोच दिखा। वह बहुत तेजी से इधर-उधर भाग रहा था। मैं समझ गया कि यह विद्रोही स्वभाव का है। देश संकट में है और यह भाग-भागकर अपनी ऊर्जा खर्च कर रहा है। थक जाएगा फिर कुछ खाएगा, जो खाएगा उसे बनाने में भी तो ऊर्जा लगी होगी, हो सकता है कि तेल भी लगा हो। इस हिसाब से कॉकरोच गद्दार ही है। यह महत्वपूर्ण चिंतन करते-करते रात हो गई। छिपकली छत पर फिर दिखी। इस बार मुंह में कॉकरोच दबाए थी। थोड़ी देर में वह कॉकरोच निगल गई। लोग भले इसे प्रकृति का नियम , फूड पिरामिड मानें पर मेरी नजर में एक देशभक्त ने देशद्रोही का खात्मा किया है। कुछ दिनों बाद घर में इतने कॉकरोच आ गए कि छिपकलियां कम पड़ गईं। मैं देशभक्तों को हारता नहीं देख सकता था, सोचा कि बाजार से कॉकरोच मारने वाला स्प्रे ले आता हूं। बाहर निकला तो देखा कार में पेट्रोल नहीं था, स्कूटी चार्ज नहीं थी और पैदल जाने में ऊर्जा खर्च होती, इसलिए वापस आया और लेट गया। धरती के घूमने का अंदाजा लगाने लगा।


