सच्ची आज़ादी

नवभारतटाइम्स.कॉम•
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मुगल सम्राट जहांगीर ने सिखों के छठे गुरु हरगोविंद साहिब जी को ग्वालियर के किले में कैद कर रखा था। कुछ समय बाद उनको रिहा करने का आदेश दिया गया, लेकिन गुरुजी ने अकेले आजाद होने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह तभी किले से बाहर जाएंगे, जब उनके साथ कैद 52 राजाओं को भी मुक्त किया जाएगा। जहांगीर ने शर्त रखी कि जितने राजा गुरुजी का दामन पकड़कर किले से बाहर आ सकेंगे, उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। जहांगीर को लगा कि इस तरह सभी राजाओं की रिहाई संभव नहीं होगी। गुरुजी ने यह शर्त स्वीकार कर ली और कुछ समय मांगा। कहा जाता है कि गुरुजी ने 52 कलियों वाला एक विशेष चोला सिलवाया। जब वे उसे पहनकर किले से बाहर निकले तो सभी 52 राजाओं ने एक-एक कली पकड़ ली। इस तरह गुरुजी ने अपनी सूझबूझ से सभी राजाओं को आजाद करा लिया। गुरुजी के अमृतसर पहुंचने पर स्वर्ण मंदिर को दीपों से सजाया गया। इसी ऐतिहासिक प्रसंग की स्मृति में बंदी छोड़ दिवस मनाया जाता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची आजादी वही है, जिसमें हम दूसरों को भी आजाद कराने का संकल्प रखें।

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