Mahatma Gandhis Sleep Secret Maulana Azad Was Also Surprised
बापू की नींद
नवभारतटाइम्स.कॉम•
महात्मा गांधी घंटों काम करते थे और आराम के लिए कम समय निकालते। एक दिन उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आजाद को किसी जरूरी विषय पर चर्चा के लिए बुलाया। मौलाना तय समय से कुछ मिनट पहले पहुंच गए। गांधीजी ने उन्हें देखकर मुस्कुराते हुए कहा, ‘मौलाना साहब, अभी चार-पांच मिनट बाकी हैं। मैं थोड़ा थक गया हूं। अगर आप इजाजत दें तो कुछ देर आराम कर लूं!’ मौलाना आजाद ने कहा, ‘बापू, आपको वैसे भी आराम का समय कम मिलता है। आप निश्चिंत होकर आराम कीजिए।’ गांधीजी वहीं लेट गए और कुछ ही क्षण में गहरी नींद में चले गए। मौलाना यह देखकर हैरान रह गए। उन्होंने सोचा कि दिनभर लोगों से मिलना, समस्याएं सुनना और लगातार काम करना निश्चित ही बहुत थका देने वाला होता होगा। लेकिन, ठीक चार मिनट बाद गांधीजी उठकर बैठ गए और बोले, ‘हां मौलाना साहब, अब बताइए। मैं बिल्कुल तैयार हूं।’ मौलाना ने आश्चर्य से पूछा, ‘बापू, आप तो पलक झपकते ही सो गए और ठीक समय पर अपने आप जाग भी गए!’ गांधीजी बोले, ‘मनुष्य को अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए। मैं भी बस उसी का अभ्यास करता हूं।’