Rbis Attack On Inflation Burden On Common Mans Pocket Fear Of Home Loan Emi Increase
त्याग का समय
नवभारतटाइम्स.कॉम•
‘रिजर्व बैंक ने आखिरकार महंगाई की नकेल कसने का हथियार चला ही दिया। बस चंद दिनों की बात है, चीनी, तेल से लेकर टमाटर, लहसुन तक सबके दाम नीचे आ जाएंगे।’ ऑफिस से लौटने के बाद चाय का कप उठाते हुए श्रीमान क ने अपनी श्रीमतीजी को चहक कर बताया।श्रीमती जी ने एक ठंडी सांस भरी और कहा, 'यह तो जब होगा तब होगा, पर तैयारी कर लीजिए। बैंक से मेसेज आने ही वाला होगा कि आपके होम लोन की EMI बढ़ गई है।' इतना सुनते ही श्रीमान क को अपना गणित हिलता हुआ-सा लगा। उनने एक बार फिर से कॉलेज के दिनों में गोता लगाया। महंगाई और रीपो रेट का समीकरण फिर दोहराया। श्रीमतीजी से बोले, 'हमारे प्रफेसर ने समझाया तो यही था कि RBI जब ब्याज दर बढ़ाता है, तो बाजार में लिक्विडिटी कम होती है। इससे लोग खर्च कम करते हैं और महंगाई घटती है।'
श्रीमतीजी ने श्रीमान क की इस गेंद को खेलने से इनकार कर दिया। वह प्रवचन की मुद्रा में आ गईं, 'मिडल क्लास परिवार की यही तो परेशानी है। महंगाई कम करने के इलाज की पहली खुराक ही इसकी जेब पर EMI के रूप में पड़ती है। आरबीआई चाहता है कि अपन नया टीवी न खरीदें, कार की बुकिंग टाल दें और बाहर खाना बंद कर दें ताकि मांग घटे। लेकिन, यहां तो टीवी खरीदे ही 8 साल हो गए हैं। कार की बात कौन करे, यहां एक स्कूटर से काम चल रहा है। रविवार को गोलगप्पों की बात किनारे कर दें तो बाहर खाने-पीने की रस्म बर्थडे और मैरिज एनिवर्सरी पर ही निभाई जा रही है।' श्रीमान को कुछ जवाब न सूझा। उधर, श्रीमतीजी अपनी रौ में थीं। 'RBI का गणित बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों को समझ आता होगा, लेकिन कोई समझाए कि महंगाई से निपटने के लिए मिडल क्लास कितना त्याग करे?'