बिना वेतन दौड़ा रहे सिटी बसें, जीवन की गाड़ी हो रही बेपटरी

नवभारतटाइम्स.कॉम•
city buses running without salary employees lives derailed
तीन महीने से सिटी ट्रांसपोर्ट के 150 से ज्यादा कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन, सिटी ट्रांसपोर्ट के एमडी से पत्र लिखकर लगाई गुहार

n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : सिटी ट्रांसपोर्ट के पहिए तो घूम रहे हैं, लेकिन कर्मचारियों की जिंदगी बेपटरी हो चुकी है। वजह है पिछले 3 महीने (जून, अगस्त और सितंबर) से अटका वेतन। जुलाई की सैलरी जैसे-तैसे मिली, पर अब दशहरा बीतने के बाद दिवाली की खुशियां भी फीकी पड़ने की कगार पर हैं। परेशान कर्मचारियों ने अब सिटी ट्रांसपोर्ट के एमडी को पत्र भेजकर बकाया वेतन और ईपीएफ (EPF) अंशदान के समय से भुगतान की गुहार लगाई है।
उत्तर प्रदेश नगरीय परिवहन कर्मचारी संघ के प्रदेश संयोजक राजकमल सिंह के मुताबिक, शहर की परिवहन व्यवस्था को पटरी पर रखने वाले कर्मचारी खुद पाई-पाई को मोहताज हैं। विशेषकर 'एसएस इंटरप्राइजेज' के जरिए तैनात परिचालकों के भुगतान का मामला बेहद गंभीर है। घर का खर्च, बच्चों की स्कूल फीस और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना दूभर हो गया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उनके पसीने की कमाई के लिए इस तरह तरसाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

ईपीएफ के अंशदान की भी मांग

राजकमल सिंह ने बताया कि कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में नियमानुसार अंशदान जमा कराया जाना कर्मचारियों के सामाजिक और आर्थिक भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। संबंधित फर्म द्वारा कर्मचारियों के वेतन से भविष्य निधि की निर्धारित राशि की कटौती की जा रही है, तो यह भी आवश्यक है कि नियोक्ता के देय अंशदान सहित संपूर्ण देय राशि निर्धारित समय-सीमा के भीतर संबंधित भविष्य निधि खातों में जमा कराई जाए। अंशदान जमा करने में विलंब अथवा अनियमितता होने से कर्मचारियों की भविष्य निधि बचत, सामाजिक सुरक्षा तथा भविष्य में मिलने वाले लाभ प्रभावित हो सकते हैं।