One Month Leave Of Railway Employees Cancelled Decision Taken Due To Crowd Of Passengers On Diwali And Chhath
एक महीने तक रेलकर्मियों की छुट्टियां रद, मंडल कार्यालय की ओर से आदेश जारी
नवभारतटाइम्स.कॉम•
n NBT रिपोर्ट, लखनऊ
दीपावली और छठ पूजा पर यात्रियों की भीड़ और सुचारु रेल संचालन के मद्देनजर उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल ने कमर्शल स्टाफ की छुट्टियों पर रोक लगा दी है। मंडल कार्यालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक 23 अक्टूबर से 25 नवंबर तक वाणिज्यिक विभाग के कर्मचारियों को सामान्य परिस्थितियों में अवकाश नहीं मिलेगा। हालांकि, यह व्यवस्था हर साल लागू की जाती है, लेकिन इस बार कर्मचारियों का दर्द सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आ रहा है। नियमों के चलते अपनी पहचान उजागर करने से बच रहे कर्मचारी पैरोडी अकाउंट और एआई से तैयार पोस्ट के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक-पीएस की ओर से जारी पत्र में मंडल के मिनिस्ट्रियल, टिकट चेकिंग, बुकिंग, आरक्षण और पार्सल कर्मचारियों की 23 अक्टूबर से 25 नवंबर तक की छुट्टियां प्रतिबंधित की गई हैं। आदेश के अनुसार, केवल असाधारण परिस्थितियों या अत्यंत आवश्यक कार्य होने पर ही सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति से अवकाश दिया जा सकेगा। त्योहारी सीजन में स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ संभालने और रेल सेवाओं के सुचारु संचालन के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। सभी संबंधित प्रभारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सेटिंग से दूसरे विभागों में ड्यूटी का आरोप
कमर्शल स्टाफ के कुछ कर्मचारियों पर कथित तौर पर सेटिंग के जरिए दूसरे विभागों में ड्यूटी लगवाकर कार्यालयों में काम करने के आरोप भी लगते रहे हैं। पिछले दिनों इसे लेकर विवाद हुआ था। इस मामले में कर्मचारी संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठे, हालांकि इस संबंध में स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। ऐसे मामलों के चलते छुट्टियों पर रोक के विरोध की आवाज भी खुलकर सामने नहीं आ पा रही है।
नियमों के डर से सामने नहीं आ रहे कर्मचारी
सेवा नियमावली के तहत सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया पर सार्वजनिक बयान देने पर प्रतिबंध या अनुशासनात्मक कार्रवाई का जोखिम हो सकता है।
यही वजह है कि कर्मचारी अपनी पहचान छिपाकर पैरोडी अकाउंट और अन्य माध्यमों से नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। पिछले दिनों एक रेलकर्मी को राजनीतिक पोस्ट लाइक करने पर नोटिस दिए जाने का मामला भी सामने आया था। ऐसे उदाहरणों के चलते इस बार भी कर्मचारी खुलकर सामने आने से बच रहे हैं।