शरद पूर्णिमा कल, चांदनी रात में खीर रखने की है परंपरा

नवभारतटाइम्स.कॉम•
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n NBT न्यूज, लखनऊः शरद पूर्णिमा व्रत रविवार को रखा जाएगा। आाश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते है। इसे कौमुदी व्रत, कोजागरी पूर्णिमा और ‘रास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है। पूर्णिमा का दान-पुन्य सोमवार को किया जाएगा। इसी दिन महर्षि वाल्मीकि जयंती भी मनाई जाएगी। पूर्णिमा को चांदनी में खीर रखने की परंपरा है।

हनुमान सेतु, वेदविद्यालय के वेदाचार्य गोविन्द कुमार शर्मा ने बताया कि पूर्णिमा तिथि रात्रि व्यापिनी होनी चाहिए। काशी के महावीर पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि रविवार को सुबह 11ः06 बजे से शुरू होकर अगले दिन सोमवार को सुबह 9ः58 बजे तक रहेगी। इसलिए व्रत सहित पूर्णिमा एवं कोजागरी पूर्णिमा का मान रविवार को ही होगा।
घी का दीपक जलाना चाहिए: उन्होंने बताया कि पूर्णिमा की रात घर में घी का दीपक जलाकर धन और ऐश्वर्य की कामना से लक्ष्मी पूजन किया जाता है। शुद्ध दूध से बनी खीर को पूर्ण चंद्रमा की चांदनी में रखा जाता है। माना जाता है कि खीर को प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने से धन, ऐश्वर्य में वृद्धि होती है और अनेक रोगों का शमन होता है।