फड़फड़ की आदत

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‘फड़फड़’ या ‘फरफर’ हिंदी के बोलचाल में इस्तेमाल होने वाला बेहद रोचक शब्द है। आमतौर पर इसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति के तेजी से, धाराप्रवाह या बिना रुके बोलने के संदर्भ में किया जाता है, जैसे- ‘वह अंग्रेजी फरफर बोलता है।’ यह शब्द लिखित की अपेक्षा बातचीत में अधिक सुनाई देता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में इस शब्द का इस्तेमाल गरमागरम चावल के लिए भी होता है- फरफर भात। मतलब चावल के दाने एक-दूसरे से बिल्कुल चिपके न हों। झारखंड के कुछ इलाके में इसके लिए ‘फरहर’ शब्द भी है। कई बार ‘फरफर’ का इस्तेमाल हास्य या व्यंग्य के लिए भी किया जाता है। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति बहुत तेजी से बोल रहा हो, तो कहा जाता है- ‘अरे, धीरे बोलो, फरफर किए जा रहे हो!’ कहीं-कहीं इसे ही फड़फड़ कहते हैं। मासूम शिशु जब लगातार रोते हैं, तो कहा जाता है, ‘देखो बच्चा फरफरा रहा है।’ इसी से मिलता-जुलता शब्द है- फड़फड़ाना। जैसे पक्षियों का पिंजरे में फड़फड़ाना।