Sepsis Every Minute Counts Save Lives With The Right Antibiotic Special On World Sepsis Day
सेप्सिस में हर मिनट अहम, सही एंटीबायोटिक बचाएगी जान
नवभारतटाइम्स.कॉम•
nNBT न्यूज, लखनऊ : तेज बुखार या सांस फूलने को अक्सर लोग सामान्य संक्रमण मानकर घर पर इलाज शुरू कर देते हैं, यही संक्रमण कब जानलेवा सेप्सिस में बदल जाए, इसका पता कई बार देर से चलता है। विशेषज्ञों के मुताबिक सेप्सिस में इलाज शुरू करने का हर मिनट बेहद अहम है। संक्रमण की समय पर पहचान, सही एंटीबायोटिक और उचित इलाज से मरीज की जान बचाई जा सकती है। केजीएमयू के क्रिटिकल केयर पल्मोनरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश ने विश्व सेप्सिस दिवस (13 सितंबर) से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दुनिया में हर साल 1.10 करोड़ लोगों की मौत सेप्सिस के कारण होती है। भारत में भी करीब 1.10 करोड़ सेप्सिस के मामले सामने आते हैं और लगभग 30 लाख मरीजों की मौत हो जाती है। उनके मुताबिक दुनिया में होने वाली लगभग हर पांचवीं मौत का संबंध सेप्सिस से है।
KGMU में आज से दो दिन मंथन : KGMU के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की ओर से 12 और 13 सितंबर को दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इसका आयोजन पल्मोक्रिट फाउंडेशन की देखरेख में सोसाइटी ऑफ प्रिसिजन मेडिसिन एंड इंटेंसिव केयर और नैशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (उत्तर प्रदेश चैप्टर) के साथ किया जा रहा है। उद्घाटन 12 सितंबर को सुबह 10 बजे शताब्दी फेज-2 के आठवें तल पर होगा।