लोकतंत्र का कलाकंद

नवभारतटाइम्स.कॉम
rs 500 notes found in kalakand boxes before elections in alwar questions on democracy
राजस्थान के अलवर में एक ऐसी घटना हुई, जिससे एक साथ कई आयाम खुल गए हैं। आरोप है कि वहां स्थानीय चुनावों से पहले एक उम्मीदवार जनता के बीच कलाकंद के डिब्बे बांटने के जुगाड़ में थे। जिन्हें नहीं पता, उन्हें बता दें कि कलाकंद एक बेहद स्वादिष्ट मिठाई है। लेकिन, इन डिब्बों में अकेले कलाकंद ही नहीं, पांच-पांच सौ के नोट भी थे।

इस तरह जो मामला केवल जीभ तक सीमित था, उसमें दिल और दिमाग भी शामिल हो गए। आरोप लगाया जा रहा है कि उम्मीदवार महोदय पेट के रास्ते दिल जीतकर वोट हासिल करना चाह रहे थे। बीच में जेब को खुश करने के लिए उन्होंने नोट का सहारा लिया। हमारे इंजीनियर साहब ने पूरा मामला सुना और एक बड़ा वाजिब सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यह केस FSSAI के दायरे में आता है या चुनाव आयोग के? आखिर डिब्बे में मिठाई भी है और नोट भी। अब यह तय करना मुश्किल है कि इसे खाद्य पदार्थ माना जाए या चुनावी सामग्री।
इंजीनियर साहब ने कहा कि अगर नोट कलाकंद के नीचे रखा गया है तो ‘फूड पैकेजिंग’, और अगर कलाकंद नोट के ऊपर है तो मामला ‘चुनावी पैकेजिंग’ का हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में चुनाव आयोग और खाद्य विभाग मिलकर एक संयुक्त जांच टीम बनाएं, जो हर मिठाई के डिब्बे को खोलकर देखे कि उसमें सिर्फ मिठास है या लोकतंत्र भी। इंजीनियर साहब के मुताबिक चुनाव सुधार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में चुनावी घोषणापत्र भी मिठाई के डिब्बों में आ सकते हैं। बस दिक्कत इतनी है कि अगर हर चुनाव में कलाकंद के साथ पांच सौ रुपये मिलने लगे तो जनता के लिए लोकतंत्र व मिठाई में फर्क करना मुश्किल हो जाएगा। वह वोट देने नहीं, अपना डिब्बा लेने मतदान केंद्र पहुंच सकती है।