Womens Asia Cup Trophy Controversy Overshadows Indias Victory Questions Raised On The Dignity Of Sports
खेल का नुक़सान
नवभारतटाइम्स.कॉम•
एक टूर्नामेंट 10 बार हुआ और 8 बार किसी एक ही टीम ने जीता, इससे ज्यादा दबदबे वाला प्रदर्शन क्या होगा! महिला एशिया कप में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने सारे मुकाबले एकतरफा अंदाज में जीते हैं। उन्होंने साबित किया कि वे एक अलग लीग में हैं, जबकि उपमहाद्वीप की दूसरी टीमें बहुत पीछे छूट चुकी हैं। इसके बावजूद कि चर्चा होती उनकी जीत की, हो रही है ट्रोफी विवाद की।
पुराना मसला । BCCI के सचिव देवजीत सैकिया के मुताबिक, एशियन क्रिकेट काउंसिल को पहले ही बता दिया गया था कि अगर भारतीय टीम जीतती है तो वह मोहसिन नकवी के हाथों ट्रोफी नहीं लेगी। नकवी इस समय ACC के अध्यक्ष हैं, लेकिन इससे बड़ी पहचान है उनका पाकिस्तान का इंटीरियर मिनिस्टर होना। भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा रिश्तों को देखते हुए भारतीय टीम का यह रुख अप्रत्याशित नहीं था। पिछले साल भारतीय पुरुष टीम के एशिया कप जीतने के बाद भी ऐसी ही स्थिति पैदा हुई थी। उस समय जो विवाद खड़ा हुआ था, वह अब तक हल नहीं हो सका है।परिपक्वता की कमी । एशियन क्रिकेट काउंसिल न तो पुराने मसले को सही ढंग से संभाल सकी और न इसे। सवाल है कि जब पहले से पता था तो बीच का रास्ता क्यों नहीं निकाला गया? पिछले महीने ही ACC गवर्निंग काउंसिल की बैठक हुई थी, इन सारे मुद्दों पर वहां बात तय हो जानी चाहिए थी। आखिर स्पोर्ट्स बॉडीज का काम सिर्फ टूर्नामेंट आयोजित करना नहीं, खेल की गरिमा और उसकी छवि को भी बचाना है। पूरी दुनिया के सामने दोहराए गए इस ड्रामे ने क्रिकेट की इमेज ही खराब की है। ACC से यहां ज्यादा परिपक्वता की उम्मीद थी।
राजनीति आज की सच्चाई । हकीकत यह है कि ICC हो, ACC या फिर दूसरी खेल संस्थाएं- वे बार-बार नाकाम हो रही हैं। यह कहने से काम नहीं चलेगा कि खेलों को राजनीति से दूर रखना चाहिए, क्योंकि मौजूदा वास्तविकता बिल्कुल अलग है। आज की जियो-पॉलिटिक्स को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता। हालांकि कम से कम ऐसी व्यवस्था जरूर बनाई जा सकती है, जिसमें राजनीतिक लड़ाई खिलाड़ियों की उपलब्धि पर भारी न पड़े। खेल और उसकी संस्थाएं किसी व्यक्ति विशेष के सम्मान से बड़ी हैं।
जिम्मेदारी समझें । ACC की स्थापना एशिया में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए की गई थी, पर अब यह राजनीतिक अखाड़ा बनती जा रही है। ग्लोबल गेम बनने के लिए संघर्ष कर रहे क्रिकेट को इस तरह की लड़ाइयों से मुक्ति पानी होगी। इसके लिए जरूरी है कि ACC जैसी संस्थाएं जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाएं।