@timesofindia.comnनई दिल्ली : महिपालपुर में लगातार जलभराव और जाम की समस्या को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने NHAI और संबंधित एजेंसियों के रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि अगस्त और सितंबर में कई बैठकें हुईं, लेकिन उनका असर जमीन पर नजर नहीं आ रहा। बैठकों में ‘बहुत सारा कागजी काम’ हुआ, लेकिन एजेंसियों की जिम्मेदारी और काम पूरा करने की स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की गई।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने ‘सोशल जूरिस्ट’ नाम के सिविल राइट्स संगठन की याचिका पर सुनवाई के दौरान 18 सितंबर के आदेश में यह टिप्पणी की। कोर्ट ने NHAI की ओर से सुनवाई में तैयार अधिकारी या वकील के मौजूद नहीं होने पर भी नाराजगी जताई। बेंच ने चेतावनी दी कि अगर संबंधित एजेंसियों ने अब भी ठोस कदम नहीं उठाए तो कोर्ट को कड़े निर्देश जारी करने पड़ेंगे।
यह सुनवाई दिल्ली सरकार की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट के बाद हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि 3 अगस्त को चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसमें महिपालपुर के जलभराव और ड्रेनेज व्यवस्था की समस्या पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार, एयरोसिटी में कमर्शल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से महिपालपुर के ड्रेनेज नेटवर्क की क्षमता प्रभावित हुई है। इसके चलते नजफगढ़ नाले में पानी का बहाव भी कम हुआ।
जलभराव की समस्या दूर करने के लिए DIAL और NHAI की ओर से कई तकनीकी उपाय सुझाए गए हैं। इनमें NH-48 के किनारे शंकर विहार से रेडिसन सर्कल तक 3.5 किलोमीटर लंबा स्टॉर्म वॉटर ड्रेन बनाने का प्रस्ताव है।