22 दिन ट्रॉमा ICU में मौत से मुकाबला

नवभारतटाइम्स.कॉम
7 year old child returns home after 22 days fighting death gets new lease of life in trauma icu
n NBT न्यूज, लखनऊ: गिलियन बैरे सिंड्रोम (GBS), गंभीर निमोनिया और सेप्टिक शॉक से जूझ रहे सात साल के बच्चे को ट्रॉमा क्रिटिकल केयर यूनिट में 22 दिनों के इलाज के बाद स्वस्थ होने पर घर भेज दिया गया। प्रयागराज निवासी बच्चे को 23 अगस्त को बेहद गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया था। पीडियाट्रिक ICU में बेड उपलब्ध नहीं होने पर उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए ट्रॉमा क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती कर तत्काल जीवनरक्षक उपचार शुरू किया गया। 14 सितंबर को उसे डिस्चार्ज किया गया। शनिवार को फॉलोअप के लिए पहुंचे बच्चे की हालत अब सामान्य बताई गई।

14 दिन वेंटिलेटर पर रहा :बच्चे को रेस्पिरेटरी फेल्योर और सेप्टिक शॉक के कारण लंबे समय तक गहन चिकित्सा की जरूरत थी। भर्ती के तुरंत बाद उसे वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। वह करीब 14 दिनों तक मैकेनिकल वेंटिलेशन पर रहा। इस दौरान लगातार निगरानी, दवाओं और अन्य जरूरी सपोर्टिव केयर के जरिए उसकी स्थिति को नियंत्रित किया गया।
टीम ने संभाला इलाज : ट्रॉमा CMS डॉ. प्रेम राज सिंह के प्रयास और समन्वय से पीडियाट्रिक ICU में बेड नहीं होने के बावजूद बच्चे को ट्रॉमा क्रिटिकल केयर यूनिट में इलाज मिला। उपचार ट्रॉमा क्रिटिकल केयर यूनिट की प्रभारी डॉ. जिया अरशद के पर्यवेक्षण में डॉ. राम गोपाल मौर्य और क्रिटिकल केयर टीम ने किया। लगातार उपचार के बाद बच्चे की हालत में सुधार हुआ। वेंटिलेटर से हटाने के बाद उसे सपोर्टिव केयर और रिहैबिलिटेशन दिया गया। 22 दिन ICU में रहने के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ और उसे घर भेज दिया गया। डॉ. प्रेम राज सिंह ने कहा कि ट्रॉमा क्रिटिकल केयर यूनिट गंभीर मरीजों को समय पर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।