श्रीमान क नाराज़ हैं

नवभारतटाइम्स.कॉम•
mr ks anger university increases fees despite government order to reduce them know the full story
'सरकार ने फीस घटाने को कहा था, यूनिवर्सिटी ने बढ़ा दी। गजब हाल है भाई साब।' सुबह-सुबह पार्क में मिले श्रीमान क शुरू हो गए। ' महंगाई के भी कुछ फायदे तो होते ही हैं। क्या खयाल है आपका?' मैंने श्रीमान क से पूछ लिया। दरअसल मैं आजकल इस गुणा गणित में लगा हूं कि अभी जब अक्टूबर में रिजर्व बैंक ब्याज दर बढ़ाएगा, तो किस बैंक में कितने का FD कराना सही रहेगा। 'मैं आपसे अंधेरगर्दी की बात कर रहा हूं, आप पैसे बनाने की तरकीब में लगे हैं।' नाराज दिख रहे श्रीमान क पाजामे से बाहर होने के कगार पर पहुंच गए। 'अच्छा है, आपका पाजामा सही तरीके से टिका तो है। वरना शेयर बाजार ने पिछले दो साल में कइयों के पाजामे घुटनों तक ला दिए हैं। बेचारे एक हाथ से नाड़ा और दूसरे से हिसाब-किताब संभाले घूम रहे हैं।' अब तो श्रीमान क बिल्कुल ही भड़क गए, 'कभी पाजामा, कभी महंगाई, कभी RBI, ये क्या लगा रखा है? मैं कह रहा हूं, सरकार ने फीस घटाने को कही थी, अगलों ने बढ़ा दी।' श्रीमान क इतनी तेजी से तार सप्तक में गए कि अगल-बगल के लोग चौंक कर देखने लगे। 'नहीं रहा होगा पैसा। हॉस्टल, लैब, लाइब्रेरी...सबका इंतजाम भी तो करना है। जिसे बुरा लगे, दिलवा दे सरकार से ज्यादा पैसा, घट जाएगी फीस। अगलों ने क्या इस फीस से चुनाव प्रचार करना है?' यहां हम खुद ही अठन्नी-चवन्नी जोड़ने में पसीना-पसीना हो रहे हैं, इनको यूनिवर्सिटी की पड़ी है।

'भाई साब, आज आपका मूड हिला हुआ है। मैं बता रहा हूं कि बाएं पैर में दर्द है, आप दाएं का ऑपरेशन करने पर आमादा हैं।' श्रीमान क बड़बड़ाते हुए चले गए। अब मैं चौंका, श्रीमान क को भी गुस्सा आने लगा है। गजब हाल है।