Post Office Digital Face Of Changing India Delivering Government Services And Financial Inclusion To Every Home
बदलते भारत का पैग़ाम घर-घर पहुंचा रहे डाकघर
नवभारतटाइम्स.कॉम•
भारत में डाकघर करोड़ों नागरिकों, विशेषकर गांवों और छोटे शहरों के लोगों के जीवन का भरोसेमंद हिस्सा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में तकनीक, आधारभूत संरचना और समावेशी विकास को जिस गति से आगे बढ़ाया जा रहा है, उसी व्यापक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है इंडिया पोस्ट का पुनर्रूपांतरण। आज भारतीय डाक अपने पारंपरिक स्वरूप से आगे बढ़कर खुद को डिजिटल अर्थव्यवस्था, ई-कॉमर्स, वित्तीय समावेशन और नागरिक सेवाओं के एक व्यापक मंच के रूप में तैयार कर रहा है। इसकी सबसे बड़ी ताकत गांव-गांव तक पहुंच, प्रशिक्षित मानव संसाधन और नागरिकों का दशकों पुराना विश्वास है।
आंकड़ों में परिणामइंडिया पोस्ट को 6 प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों- मेल, पार्सल, अंतरराष्ट्रीय डाक, डाक जीवन बीमा, वित्तीय सेवाओं और नागरिक-केंद्रित सेवाओं के आधार पर पुनर्गठित किया गया है। इसके साथ तकनीक, मार्केटिंग, नेटवर्क, मानव संसाधन और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रत्येक क्षेत्र के लिए स्पष्ट लक्ष्य, जवाबदेह नेतृत्व, समीक्षा और परिणामों की जिम्मेदारी तय की जा रही है।
वित्त वर्ष 2024-25 में इंडिया पोस्ट का राजस्व रहा लगभग 13,218 करोड़ रुपये। 2025-26 में करीब 16% की वृद्धि के साथ यह 15,296 करोड़ हो गया। विभिन्न स्तरों पर लक्ष्यों को आपस में जोड़ा गया है, ताकि जमीनी असर दिखे। लगातार निगरानी और समीक्षा हो रही है। 2025-26 में 7.49 करोड़ घरेलू, 72 लाख अंतरराष्ट्रीय पार्सल और 87.37 करोड़ डाक वस्तुओं की डिलिवरी हुई। अमेजन-फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों से साझेदारी, डाकघर निर्यात केंद्रों का विस्तार और ई-कॉमर्स से जुड़ाव छोटे उद्यमियों के लिए नए बाजार खोल रहा है। आगे विशेष डिलिवरी केंद्र, मशीनीकृत डिलिवरी, GPS निगरानी से सिस्टम को और आधुनिक बनाया जाएगा। जरूरत के अनुसार ड्रोन तकनीक अपनाने की तैयारी है।
डाकघर देश की वित्तीय व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण आधार बन रहा है। डाक जीवन बीमा और ग्रामीण डाक जीवन बीमा की 1.31 करोड़ सक्रिय पॉलिसी हैं, जिनसे करीब 1.99 लाख करोड़ की राशि जुड़ी है। डाकघर बचत बैंक के 40.05 करोड़ सक्रिय अकाउंट्स हैं। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (POSB) के 13 करोड़ से अधिक खातों के जरिए डिजिटल बैंकिंग और घर-घर वित्तीय सेवाओं की पहुंच लगातार बढ़ रही है।
डाकघरों का नेटवर्क सरकारी सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा रहा है। अब तक 15.79 करोड़ नागरिकों को आधार सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। 450 से अधिक पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्रों के माध्यम से 2 करोड़ से अधिक पासपोर्ट आवेदनों पर कार्रवाई हो चुकी है। इंडिया पोस्ट को ऐसे राष्ट्रव्यापी Assisted Service Platform के रूप में विकसित करना है, जहां नागरिकों को सरकारी सेवाएं उनके पास मिल जाएं। स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) के सहयोग से 40 डाकघरों के आधुनिकीकरण का पायलट पूरा किया जा चुका है। एक समान डिजाइन और ब्रैंडिंग, बेहतर ग्राहक अनुभव, नई पीढ़ी के डाकघर (N-Gen Post Offices), एटीएम, बेहतर पार्सल सुविधाएं, विस्तारित कार्य समय और आफ्टर-आवर्स बुकिंग जैसी व्यवस्थाएं डाकघरों को आधुनिक सेवा केंद्रों में बदल रही हैं।
इन बदलावों में तकनीक अहम है। ‘डाक सेवा’ जैसे डिजिटल माध्यमों से ट्रैकिंग, स्पीड पोस्ट, शिकायत और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। आईटी 2.0, UPI, OTP आधारित डिलिवरी और आधुनिक पार्सल प्रणालियां डाक नेटवर्क को डिजिटल सुविधा से जोड़ रही हैं। ‘डाक मित्र’ के जरिए कर्मचारी काउंटर से बाहर भी बुकिंग, बैंकिंग और बीमा जैसी सेवाएं दे सकते हैं। डेटा को एकीकृत कर ग्राहकों की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने पर जोर है। AI आधारित सुझावों के माध्यम से किसी बचत ग्राहक के लिए बीमा सेवा या किसी MSME ग्राहक के लिए निर्यात की सुविधा जैसी संभावनाएं सामने लाई जा सकती हैं। इसी बदलाव के साथ इंडिया पोस्ट का भविष्य ‘फिजिटल’ (Physical + Digital) स्वरूप में आकार ले रहा है।
कर्मचारी केंद्र में
किसी संस्था का वास्तविक परिवर्तन केवल तकनीक से नहीं होता। उसके पीछे काम करने वाले लोगों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। कर्मचारियों को लॉजिस्टिक्स, डिजिटल संचालन, बिक्री और ग्राहक सेवा जैसी नई भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इंडिया पोस्ट का यह बदलाव किसी एक सरकारी विभाग के आधुनिकीकरण की कहानी भर नहीं। यह उदाहरण है कि किस तरह सार्वजनिक संस्थान अपनी विरासत और भरोसे को बनाए रखते हुए नई अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप स्वयं को बदल सकते हैं। ‘डाक सेवा, जन सेवा’, यह भाव डिजिटल युग में एक नए विस्तार के साथ आगे बढ़ रहा है।
(केंद्रीय संचार व पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री)