The True Beauty Of Creation Lies In Imperfection The Unique Journey Of An Artist
अधूरेपन में छिपी है सृजन की असली ख़ूबसूरती
Contributed by: हरीश बड़थ्वाल|नवभारतटाइम्स.कॉम•
क्या आपने कभी सुना है कि किसी कलाकार ने अपने पूरे जीवन में केवल एक ही रचना प्रस्तुत की हो और वही उसकी अंतिम कृति बन गई? रचना इतनी शानदार कि सभी उसे कालजयी मानें, पर इसके बाद रचनाकार सृजन की दुनिया छोड़ दे! सच्चा रचनाकार शायद ही कभी रुकता है। वह जानता है कि उसकी पिछली रचना अंतिम पड़ाव नहीं, अगली यात्रा की शुरुआत है। आम लोगों को अपनी ओर खींचने वाले दिखावे शायद उसे लंबे समय तक संतुष्ट नहीं कर पाते। उसकी असली दुनिया उन सवालों में बसती है, जो समाज और जीवन से जुड़े हैं। वह अपनी रचना के जरिए कुछ कहने, समझने और बदलने की कोशिश करता है।
दुनिया किसी रचना को कितना भी श्रेष्ठ क्यों न मान ले, उसका निर्माता अक्सर उससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता। उसे कोई न कोई कमी दिखाई देती है। अगली रचना में वह पिछली कमियों को दूर करने की कोशिश करता है। परिपूर्णता ऐसी मंजिल है, जिसे पूरी तरह हासिल करना संभव नहीं। फिर भी उसे पाने की इच्छा मनुष्य को लगातार आगे बढ़ाती है। हर नई कोशिश में वह अपनी सीमाओं को थोड़ा और पीछे छोड़ता है और अपने व्यक्तित्व का बेहतर रूप सामने लाता है। शायद इसी अधूरेपन में सृजन की असली खूबसूरती छिपी है।