Sir Notice No Unnecessary Questioning For Minor Mistakes Election Commissions 20 day Plan
SIR नोटिस : मामूली गलतियों पर नहीं होगी बेवजह पूछताछ
नवभारतटाइम्स.कॉम•
Maneesh.Aggarwal
@timesofindia.comn नई दिल्ली : दिल्ली में SIR के तहत नोटिस पाने वाले 33 लाख मतदाताओं को अब वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए बेवजह परेशान नहीं होना पड़ेगा। चुनाव आयोग ने ऐसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए 20 दिन का प्लान तैयार किया है। खासकर नाम में मामूली अंतर या छोटी-मोटी क्लेरिकल गलती पर वोटरों से अनावश्यक दस्तावेज या पूछताछ नहीं की जाएगी। अगर उनकी नागरिकता, उम्र और पहचान को लेकर कोई शक नहीं है तो मामूली दस्तावेजी प्रक्रिया के आधार पर नाम को ओके किया जाएगा।
चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि समस्या के समाधान करने के दो सिस्टम बनाए गए हैं। पहला, लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के नाम पर जिस भी किसी वोटर के नाम में थोड़ी-बहुत असमानता (गड़बड़ी) रह गई है। उसे 10 दिनों के अंदर मामूली दस्तावेजी प्रक्रिया के तहत दूर कर दिया जाएगा। इसके लिए बीएलओ को कहा गया है कि वह बस उसके लेटेस्ट नाम के बारे में जानकारी कन्फर्म कर लें। उदाहरण के तौर पर अगर 2003 एसआईआर में उसका नाम केवल सुरेश था और अब सरनेम या अन्य कुछ जोड़ा गया है तो इसे गंभीर ना माना जाए। अगर वोटर की उम्र, डेट ऑफ बर्थ, फादर नेम और उसके भारतीय होने में कोई संदेह नहीं है तो उसे किसी भी मान्य दस्तावेज के आधार पर ओके कर दिया जाए। इससे 33 लाख में से करीब 15 लाख वोटरों की समस्या का समाधान हो जाएगा।
बाकी बचे 18 लाख वोटरों में से जिस किसी के पुराने एसआईआर से मैपिंग नहीं हो रही है या फिर अन्य किसी तरह की बड़ी समस्या लग रही है। तो ऐसे मामलों में भी वोटर से डिक्लेरेशन कराते हुए कोई भी मान्य दस्तावेज के आधार पर इसे वोटर लिस्ट में ऐड कर लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि ऐसे किसी भी मामले में अगर किसी वोटर का नाम पुराने एसआईआर में नहीं भी था तो भी अब चल रही एसआईआर प्रक्रिया में ऐसे किसी वोटर का नाम डिलीट नहीं किया जा सकता। सेंटरों पर भी वोटरों को बहुत अधिक उलझाने की कोई जरूरत नहीं है।
ऐसे भी किसी मामले में जिनके दो बच्चे हैं और उनके डेट ऑफ बर्थ में सेम है। अगर वोटर कहता है कि जुड़वा बच्चे हैं तो उससे बीएलओ अपने स्तर पर कन्फर्म करके ऐसे मामलों को ओके कर दें। इसी तरह से किसी वोटर और उसके माता-पिता की उम्र में 15-16 साल का ही अंतर है तो भी बीएलओ और एईआरओ अपने स्तर पर कन्फर्म मामलों का निपटारा कर दें। सूत्रों का कहना है कि अब पुरानी वोटर लिस्ट और एसआईआर में दी गई फोटो के भी मिलान करने शुरू कर दिए गए हैं। इस मसले को 23 सितंबर को एनबीटी ने प्रमुखता से उठाया था।
मेसेज भी मिलेगा : जिस भी वोटर की प्रॉब्लम दूर होती जाएगी। उसके पास मेसेज भी भेजने की योजना है। ताकि उसे पता लग जाए कि अब उसे सेंटर में जाने की जरूरत नहीं है और नोटिस की समस्या दूर हो चुकी है। ऐसे वोटरों की ऑनलाइन जारी की गई लिस्ट के आगे भी समस्या समाधान लिखा जाएगा। ताकि सभी को ऑनलाइन भी यह जानकारी अपडेट हो सके।