नज़र ख़ुद पर रखिए, दूसरों के जीवन पर नहीं

Contributed by: देवेन्द्र ब्रह्मचारी|नवभारतटाइम्स.कॉम•
focus on yourself not others the path to a meaningful life
आज के समय में हम विज्ञान, तकनीक और भौतिक सुविधाओं के गुलाम बनते जा रहे हैं। मोबाइल फोन ने मानो पूरी दुनिया को हमारी हथेली में ला दिया है। सच है कि घर, दफ्तर और यात्रा- हर जगह तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है। लेकिन, इस सुविधा के बीच एक बड़ी समस्या भी सामने आई है। मनुष्य अपने भीतर से दूर होता जा रहा है। इसलिए हमें अपनी जीवनशैली पर भी विचार करना होगा।आज हम दूसरों को देखते हैं और उनसे अपनी तुलना करते हैं। सोशल मीडिया ने इस सोच को और बढ़ा दिया है। किसी की सफलता, संपत्ति या सुख देखकर हम अपने जीवन को उससे तौलने लगते हैं। इससे ईर्ष्या, तनाव, क्रोध और हीनभावना पैदा होती है। जब हमारी नजर अपनी कमियों और खूबियों पर न होकर दूसरों के जीवन पर रहती है, तो मन अशांत होने लगता है।

इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए हमें दो बातों पर ध्यान देना होगा- अपनी उपयोगिता बढ़ाना और स्वयं को देखना। अपनी उपयोगिता बढ़ाने का अर्थ है- अपने ज्ञान, क्षमता और अनुभव को पहचानना व उसे बेहतर बनाना। हमें यह देखना चाहिए कि हमारी योग्यता का कितना सदुपयोग हो रहा है। विज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल केवल अपनी सुविधा के लिए नहीं, दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने और प्रकृति की रक्षा के लिए भी होना चाहिए।दूसरी महत्वपूर्ण बात है स्व-दर्शन यानी आत्मनिरीक्षण। समुद्र के किनारे टहलने वाले को सीपियां मिलती हैं, लेकिन मोती पाने के लिए समुद्र की गहराई में उतरना पड़ता है। इसी तरह जीवन का वास्तविक आनंद पाने के लिए भीतर झांकना होता है। जब हम अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार को ईमानदारी से देखते हैं, तो अपनी कमजोरियों को समझने और उन्हें सुधारने का अवसर मिलता है।
वास्तविक प्रगति का अर्थ केवल भौतिक समृद्धि नहीं, ऐसी चेतना का विकास है जो अपनी क्षमता को मानवता और प्रकृति के हित में लगा सके। जब हम दूसरों को बदलने के बजाय स्वयं को समझने और अपनी उपयोगिता बढ़ाने का प्रयास करते हैं, तब जीवन अधिक सार्थक और समाज अधिक संतुलित बनता है।