Special Focus On Disability And Mental Health Swajanganna To Begin Soon In The State
सबसे होगा दिव्यांगता पर सवाल, मानसिक सेहत पर खास फोकस
नवभारतटाइम्स.कॉम•
n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : प्रदेश में 15 नवंबर से प्रस्तावित स्वजनगणना और 1 दिसंबर से शुरू हो रहे फील्ड सर्वे में दिव्यांगता की पहचान पर भी ध्यान दिया जाएगा। खास तौर पर मानसिक दिव्यांगता से जुड़े मामलों की पहचान और गणना पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिससे मानसिक बीमारी या दिव्यांगता से जुड़े लोगों की सही संख्या सामने आ सके। खास बात यह है कि दिव्यांगता संबंधी प्रश्न प्रत्येक व्यक्ति से पूछे जाएंगे और केवल बाहरी रूप देखकर किसी को दिव्यांग या सामान्य नहीं माना जाएगा।
जनगणना के दूसरे चरण के लिए प्रशिक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस कड़ी में प्रस्तावित सवालों, उसकी प्रक्रिया व उससे जुड़ी संवेदनशीलता के बारे में भी विस्तार से बताया जा रहा है। मसलन, जनगणना में सबसे यह पूछा जाएगा कि व्यक्ति किसी प्रकार की दिव्यांगता से ग्रसित है या नहीं। यदि उत्तर ‘हां’ है तो संबंधित दिव्यांगता का प्रकार दर्ज किया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति को एक से अधिक दिव्यांगताएं हैं तो अधिकतम तीन दिव्यांगताओं को उनकी गंभीरता के क्रम में दर्ज किया जाएगा।अस्थायी तनाव, उदासी नहीं गिनी जाएगी : एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मानसिक दिव्यांगता के तहत ऐसे लोगों को शामिल किया जाएगा जिन्हें लंबे समय से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं और जिनकी सोच, व्यवहार, मनोदशा या सामाजिक जीवन प्रभावित होता है। इसमें अवसाद, अत्यधिक चिंता, ऑब्सेसिव कंपल्सिव व्यवहार, लंबे समय तक मूड में बदलाव, भ्रम या ऐसी आवाजें सुनाई देना जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं। हालांकि, अस्थायी तनाव, किसी घटना के बाद सामान्य उदासी या अल्पकालिक नींद की समस्या को मानसिक बीमारी नहीं माना जाएगा।
बहस नहीं, जो मिले जानकारी दर्ज करें : निर्देशों में यह भी कहा गया है कि गणनाकर्मी मानसिक बीमारी के बारे में बहस या जांच पड़ताल न करें। परिवार जो जानकारी दे, उसे ही दर्ज किया जाए। किसी तरह की मेडिकल रिपोर्ट या परीक्षण की मांग भी नहीं की जाएगी। मानसिक बीमारी के अलावा अन्य कई प्रकार की दिव्यांगताओं की भी गणना होगी। इनमें दृष्टि संबंधी दिव्यांगता, श्रवण दिव्यांगता, वाणी एवं भाषा संबंधी दिव्यांगता, चलने फिरने या गतिशीलता संबंधी दिव्यांगता, बौद्धिक दिव्यांगता, न्यूरोलॉजिक कंडीशन व ब्लड डिसऑर्डर शामिल है। एसिड विक्टिम की भी पहली बार अलग से गिनती की जाएगी।
सवाल सम्मानजक हों : बौद्धिक दिव्यांगता की श्रेणी में सीखने में कठिनाई, निर्णय लेने में समस्या, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर और विशिष्ट अधिगम अक्षमता जैसी स्थितियों को शामिल किया गया है। वहीं, गतिशीलता संबंधी दिव्यांगता में अंगों की कमी, लकवा, मांसपेशियों की गंभीर कमजोरी, सेरेब्रल पाल्सी बौनापन जैसी स्थितियों का रेकॉर्ड रखा जाएगा। जनगणना अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि दिव्यांगता संबंधी सवाल सम्मानजनक और संवेदनशील तरीके से पूछे जाएं।