औद्योगिक इकाइयों में धुएं का फर्ज़ी हिसाब! निगरानी पर सवाल

नवभारतटाइम्स.कॉम•
questions on industrial smoke monitoring fake accounts and data unreliability
nNBT रिपोर्ट, लखनऊ: प्रदेश की बड़ी औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकलने वाले प्रदूषण की ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) और पर्यावरण थिंक टैंक iFOREST की संयुक्त रिपोर्ट में सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (CEMS) के कैलिब्रेशन, सत्यापन और रखरखाव में कई खामियां सामने आई हैं। इससे CEMS से मिलने वाले प्रदूषण के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के लिए थर्मल पावर, चीनी, सीमेंट, कागज और कपड़ा समेत विभिन्न क्षेत्रों की 41 औद्योगिक इकाइयों में लगे 163 CEMS की जांच की गई। इनमें सिर्फ 27% उद्योग ही अपने उपकरणों के प्रमाणित होने का ठोस प्रमाण दे सके, जबकि 73% इकाइयों में इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं थी। ज्यादातर उद्योगों ने कैलिब्रेशन और रखरखाव की जिम्मेदारी वेंडरों को सौंप रखी है, लेकिन इसकी प्रभावी क्रॉस-चेकिंग की व्यवस्था नहीं मिली।

सत्यापन का प्रभाती तंत्र नहीं : जांच में यह भी सामने आया कि उद्योगों में CEMS से मिलने वाले रियल-टाइम आंकड़ों को नियामकीय जांच के लिए जरूरी प्रारूप में बदलने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है। उपकरण निर्धारित स्थान और मानकों के अनुरूप काम कर रहे हैं या नहीं, इसके सत्यापन का भी प्रभावी तंत्र नहीं मिला। स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमिशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने CEMS डेटा सार्वजनिक करने और गड़बड़ियों की पहचान के लिए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल का सुझाव दिया। UPPCB अध्यक्ष डॉ. रवींद्र प्रताप सिंह ने तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। iFOREST के सीईओ डॉ. चंद्र भूषण ने पारदर्शी CEMS व्यवस्था को औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी बताया। रिपोर्ट में व्यवस्था सुधारने के लिए 18 महीने का चरणबद्ध रोडमैप सुझाया गया है। इसमें उपकरणों की खामियां दूर करने, तकनीकी प्रमाण उपलब्ध कराने, डेटा जांच मजबूत करने और अधिकारियों के प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है।