India us Relations Complexities On Terrorism And Trade Revealed By Jaishankars Statement
जटिल रिश्ता
नवभारतटाइम्स.कॉम•
व्यापार और रक्षा समझौतों से लेकर QUAD तक, पिछले कुछ बरसों में भारत-अमेरिका के संबंध काफी आगे बढ़े हैं। वॉशिंगटन कई मौकों पर नई दिल्ली को बेहद अहम रणनीतिक साझेदार बता चुका है। इसके बाद भी द्विपक्षीय संबंधों में जटिलताएं हैं और विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बयान इस बात को सामने रखता है।
सीमा पार आतंकवाद । विदेश मंत्री ने आतंकवाद और ट्रेड डील पर बात की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद भारत की प्रमुख चिंताओं में से एक है और अगर उसके साझेदार इस चिंता को पूरी तरह नहीं समझते, तो इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है। भारत के लिए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा रहा है। उसने लगातार इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया है, और रणनीतिक साझेदारों से कम से कम इतनी तो अपेक्षा रहती है कि वे भारत की बात समझेंगे। लेकिन, अमेरिका की तरफ से पर्याप्त समझ और संवेदनशीलता नहीं दिखती।तथ्यों की अनदेखी । पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के जवाब और उसके बाद बनी स्थितियों में भी अमेरिका का रुख समझदारी वाला नहीं कहा जा सकता। भारत-पाकिस्तान का मामला दुनिया के दूसरे द्विपक्षीय मामलों से बिल्कुल अलग है। कोई और देश नहीं, जो इतने लंबे वक्त से अपने पड़ोसी से आतंकी खतरे को झेल रहा हो। लेकिन, ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रिया में इन सारे तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है।
डील में समस्या । इसी तरह एक और उलझा हुआ पहलू ट्रेड डील का है। इस पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है, और वजह यही है कि अमेरिका यहां भी भारत के पक्ष को समझ नहीं पा रहा। ऊपर से उसकी टैरिफ नीतियों ने द्विपक्षीय रिश्तों के लिए चुनौती बढ़ा दी है। हालांकि इन बातों का सबब और इतिहास का सबक यही है कि अमेरिका किसी मुल्क के साथ रिश्तों में हमेशा अपनी जरूरत को तवज्जो देता है। चीजों को समझने का उसका अपना तरीका है।
उदाहरण सामने । कनाडा और यूरोप के साथ उसके संबंध उदाहरण हैं। दशकों पुराने इन रिश्तों पर सवाल उठ रहे हैं। कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने तो पिछले दिनों अमेरिका के संभावित हमले तक पर बात की थी, भले आशंका न्यूनतम ही सही। इनका सार यही है कि अमेरिका से यह आशा नहीं बांधी जा सकती कि हमेशा सबकुछ ठीक ही चलेगा। प्यार के साथ तकरार उसकी विदेश नीति का हिस्सा है। ट्रंप के दौर में यह और भी जाहिर हो रहा है। भारत को इसी के बीच द्विपक्षीय रिश्तों को चलाना है और इस बात का ख्याल रखना है कि उसके हितों पर आंच न आए।