Mamdani netanyahus War Of Words In New York Heated Debate On War Crimes Antisemitism And Palestinian Suffering
ममदानी-नेतन्याहू के बीच फंसा न्यूयॉर्क
नवभारतटाइम्स.कॉम•
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की इस बार की बैठक अखाड़ा बन गई। रूस-यूक्रेन युद्ध, महंगे तेल की हाय-हाय, डॉनल्ड ट्रंप की ईरान को नक्शे से मिटाने की धमकी और ईरान की ईंट का जवाब पत्थर से देने की चेतावनी के बीच ममदानी-नेतन्याहू का वाकयुद्ध भी सुर्खियों में है। दोनों पक्षों के समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं। यह महज दो नेताओं के अहंकार का टकराव नहीं, हजारों साल पुरानी धार्मिक और सियासी तनाव की गूंज भी है।
आरोप और पलटवार । न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने इस्राइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को युद्ध अपराधी बताया। कहा कि 73,000 से अधिक लोगों की हत्या के लिए नेतन्याहू जिम्मेदार हैं और फलस्तीनी नरसंहार के सूत्रधार की गिरफ्तारी के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने वारंट जारी किया है। इसलिए न्यूयॉर्क में उनके लिए कोई जगह नहीं। नेतन्याहू ने पलटवार करते हुए ममदानी को यहूदी-विरोधी मेयर बताया और कहा कि उन्हें शर्म आनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ममदानी के मेयर चुने जाने के बाद से न्यूयॉर्क में कई यहूदी खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।समाधान नहीं । यरूशलम तीनों इब्राहिमी धर्मों के लिए पवित्र है। जहां कभी यहूदियों का मंदिर था, वहीं आज अल-अक्सा मस्जिद है। कुछ ही कदम की दूरी पर वह चर्च है, जिसे ईसाई क्राइस्ट का समाधि-स्थल मानते हैं। 1948 में इस्राइल बना तो सदियों से भटक रहे यहूदियों को अपना देश मिला, लेकिन करीब सात लाख फलस्तीनी बेघर हो गए। 1967 के युद्ध के बाद वेस्ट बैंक और गाजा इस्राइल के कब्जे आ गए। इसके बाद इस्राइली बस्तियां बढ़ती गईं और शांति समझौतों के बावजूद विवाद का समाधान नहीं निकल सका।
दोतरफा हमला । 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुए टकराव में अब तक 73,000 से अधिक फलस्तीनी मारे जा चुके हैं। UN के एक जांच आयोग ने इस्राइल की कार्रवाई को जेनोसाइड बताया है। इस मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमा चल रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। नेतन्याहू इन आरोपों को ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताते हैं और हमास पर नागरिकों को ढाल बनाने का आरोप लगाते हैं।
दो चिंताएं । न्यूयॉर्क में यह विवाद इसलिए संवेदनशील है क्योंकि इस्राइल के बाहर सबसे बड़ी यहूदी आबादी, यहीं रहती है। ऐसे शहर के पहले मुस्लिम मेयर जब इस्राइली प्रधानमंत्री को युद्ध अपराधी कहते हैं, तो मामला स्थानीय राजनीति से निकलकर अंतरराष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन जाता है। UN के बाहर एक ओर सैकड़ों लोग इस्राइली झंडे लेकर यहूदी-विरोध के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, तो दूसरी ओर ‘फ्री फलस्तीन’ के नारे गूंज रहे थे। इस पूरे विवाद में दो चिंताएं हैं- यहूदी समुदाय की सुरक्षा और यहूदी विरोध का मुद्दा। वहीं फलस्तीनियों की मानवीय पीड़ा भी गंभीर सवाल है।
गहरा मतभेद । नेतन्याहू का विरोध करने वालों में बड़ी संख्या में यहूदी ही थे। प्रवासी इस्राइलियों ने अपने देश के झंडे लहराते हुए लोगों से अगले महीने होने वाले चुनाव में नेतन्याहू को हटाने की अपील की। उनके बैनर पर लिखा था, ‘नेतन्याहू, तुम्हारा समय पूरा हुआ।’ ‘ज्यूइश वॉयस फॉर पीस’ के प्रदर्शन में सौ से अधिक लोग गिरफ्तार हुए। कट्टर रूढ़िवादी हसीदी यहूदियों का एक छोटा समूह तो इस्राइल राष्ट्र के अस्तित्व का ही विरोध करता दिखा। इन प्रदर्शनों से साफ हुआ कि नेतन्याहू की नीतियों और युद्ध पर यहूदियों के भीतर भी मतभेद हैं।
प्रमुख प्रस्ताव । जिस कौम ने तकरीबन ढाई हजार साल तक बेघर होने का दर्द झेला, उसी जमीन पर आज दूसरी कौम विस्थापन का दंश झेल रही है। लेकिन, इसका जवाब यहूदी-विरोध नहीं हो सकता और यहूदी-विरोध की चिंता को गाजा की मानवीय पीड़ा पर पर्दा भी नहीं बनाया जा सकता। न्यूयॉर्क की सड़कों पर इस्राइली झंडा थामे नेतन्याहू का विरोध कर रहे यहूदी भी यही फर्क सामने रख रहे थे। अगले साल यरूशलम में सदियों पुरानी प्रार्थना तभी सार्थक होगी, जब उस जमीन पर दोनों समुदायों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक जगह हो। दो-राष्ट्र समाधान इसी बहस का प्रमुख प्रस्ताव है।