Supreme Courts Big Decision If Trial Is Delayed Custody Cannot Become Punishment
ट्रायल में देरी तो हिरासत सज़ा नहीं बन सकती: SC
नवभारतटाइम्स.कॉम•
nNBT रिपोर्ट, नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मुकदमे की सुनवाई शुरू होने और उसके जल्द पूरा होने की संभावना न हो तो ट्रायल से पहले की हिरासत को सजा के रूप में नहीं बदला जा सकता।कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हस्तक्षेप जरूरी हो सकता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने राजस्थान के सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े 2024 के मामले में दो आरोपियों को जमानत दे दी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने संजय बड़ाया और शुभांशु दीक्षित की याचिकाओं पर यह आदेश दिया। दोनों ने राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा नियमित जमानत से इनकार किए जाने के आदेशों को चुनौती दी थी। बेंच ने कहा कि यह आपराधिक न्यायशास्त्र का स्थापित सिद्धांत है कि ट्रायल से पहले की हिरासत को दंडात्मक हिरासत का रूप नहीं दिया जा सकता, खासकर तब जब ट्रायल शुरू होने और खत्म होने में अभी काफी समय हो। मामला जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।