मणिपुर में कुकी-जो काउंसिल ने सीआरपीएफ की छापेमारी की निंदा की, पु डौमिनलाल हाओकिप के घर पर बिना वारंट तलाशी का आरोप

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Navbharat Times
मणिपुर में कुकी-जो काउंसिल (केजेडसी) ने सीआरपीएफ की कोबरा यूनिट द्वारा रविवार देर रात को कांगपोकपी के बोंगफाजोल में स्थित पु डौमिनलाल हाओकिप के घर पर की गई छापेमारी की कड़ी निंदा की है। पु डौमिनलाल हाओकिप, जो केजेडसी के जॉइंट सेक्रेटरी और कुकी इनपी मणिपुर (केआईएम) के सेक्रेटरी (संगठन) हैं, उस समय चुराचांदपुर में केआईएम के प्रेसिडेंट के साथ एक मीटिंग में थे जब सुरक्षा बलों ने बिना किसी सर्च वारंट के उनके घर में घुसकर तलाशी ली। यह घटना रविवार रात करीब 2:30 बजे हुई, जब परिवार सो रहा था, जिससे महिलाओं और बच्चों में डर का माहौल पैदा हो गया। केजेडसी ने इस कार्रवाई को "बेहद परेशान करने वाली" और "पेशेवर सुरक्षा बलों के लिए शोभा नहीं देने वाली" बताया है।

केजेडसी का कहना है कि पु डौमिनलाल हाओकिप एक सम्मानित सिविल सोसाइटी लीडर हैं। अगर अधिकारियों के पास तलाशी लेने का कोई ठोस कारण था, तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था। उन्हें जरूरी मंजूरी लेनी चाहिए थी और कानूनी व सम्मानजनक तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए थी। केजेडसी के अनुसार, बिना सही प्रक्रिया का पालन किए देर रात छापा मारना कानून के शासन और एक सम्मानित सार्वजनिक हस्ती की गरिमा का अनादर है।
यह संगठन इस मनमानी कार्रवाई की कड़ी निंदा करता है। केजेडसी ने संबंधित अधिकारियों से इस ऑपरेशन के कानूनी आधार को स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही, इसमें शामिल कर्मियों के आचरण की निष्पक्ष जांच शुरू करने की भी मांग की गई है। केजेडसी का मानना है कि सुरक्षा ऑपरेशन पूरी तरह से कानून के दायरे में होने चाहिए। इन ऑपरेशनों में सभी नागरिकों के अधिकारों और सम्मान का उचित ध्यान रखा जाना चाहिए।

केजेडसी पु डौमिनलाल हाओकिप और उनके परिवार के साथ एकजुटता से खड़ा है। संगठन सुरक्षा बलों से आग्रह करता है कि वे भविष्य के सभी ऑपरेशनों में पेशेवर रवैया अपनाएं। उन्हें संयम बरतना चाहिए और उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। यह घटना मणिपुर में सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है और नागरिक समाज के नेताओं की सुरक्षा और गरिमा को लेकर चिंताएं बढ़ाती है। केजेडसी ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी तरह की गैरकानूनी या अनैतिक कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेंगे और न्याय के लिए आवाज उठाते रहेंगे। इस तरह की घटनाएं आम लोगों के मन में सुरक्षा बलों के प्रति अविश्वास पैदा कर सकती हैं, जो किसी भी समाज के लिए हानिकारक है। इसलिए, यह आवश्यक है कि सुरक्षा बल अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते समय अत्यंत सावधानी और सम्मान का परिचय दें।