वन नेशन, वन इलेक्शन: अनुराग ठाकुर ने लखनऊ में Jpc की बैठक में दिए सुझाव, राजनीतिक दलों से राय मशविरा जारी
वन नेशन, वन इलेक्शन: अनुराग ठाकुर ने लखनऊ में JPC की बैठक में दिए सुझाव, राजनीतिक दलों से राय मशविरा जारी
NewsPoint•
लखनऊ, 13 जुलाई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद अनुराग ठाकुर ने सोमवार को लखनऊ में बताया कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' कानून की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) देश भर के राजनीतिक दलों, सरकारी अधिकारियों और अन्य हितधारकों से सुझाव ले रही है। समिति सभी पक्षों की राय और सुझावों को शामिल करने के बाद ही एक साथ चुनाव कराने से जुड़े विधेयक पर अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देगी।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि संयुक्त संसदीय समिति इस समय प्रस्तावित चुनाव सुधार को लेकर देशव्यापी परामर्श अभियान के तहत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंची है। अनुराग ठाकुर ने कहा, “वन नेशन, वन इलेक्शन पर गठित संयुक्त संसदीय समिति कई राज्यों का दौरा कर चुकी है। इस दौरान राजनीतिक दलों, सरकारी अधिकारियों और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों से बातचीत की जा रही है। सरकार द्वारा प्रस्तावित विधेयक को बेहतर बनाने के लिए सुझाव और संशोधन मांगे जा रहे हैं। इसका उद्देश्य देशभर में Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था तैयार करना है।”उन्होंने बताया कि मौजूदा चुनाव प्रणाली के कारण बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू होती है, जिससे शासन व्यवस्था प्रभावित होती है। अनुराग ठाकुर ने कहा, “वर्तमान व्यवस्था में पांच साल के दौरान कई बार आदर्श आचार संहिता लागू होती है, जिससे शासन व्यवस्था बाधित होती है और निवेश तथा विकास परियोजनाओं की गति प्रभावित होती है। इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया अक्सर अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों पर हावी हो जाती है, क्योंकि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और संसाधनों को चुनावी ड्यूटी में लगाया जाता है।”
भाजपा नेता ने कहा कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने-अपने विचार हैं। एक साथ चुनाव कराने के समर्थन में पर्याप्त आंकड़े मौजूद हैं, हालांकि कुछ राजनीतिक दलों को इस व्यवस्था को लेकर आशंकाएं भी हैं। उन्होंने कहा, “वन नेशन, वन इलेक्शन के विचार के समर्थन में काफी आंकड़े मौजूद हैं और इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में लोगों को शामिल किया जा रहा है। हालांकि राजनीतिक दलों की राय अलग-अलग है। कुछ दलों को आशंका है कि अगर देशभर में एक साथ चुनाव होते हैं तो राष्ट्रीय मुद्दे चुनावी चर्चा में ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं और क्षेत्रीय मुद्दों को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाएगी। इन अलग-अलग तर्कों के बावजूद बड़ी संख्या में लोग वन नेशन, वन इलेक्शन पहल का समर्थन करते हैं।”
यह संयुक्त संसदीय समिति 17 जुलाई को होने वाली बैठक में अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने और उसे स्वीकार करने की उम्मीद रखती है। इसके बाद रिपोर्ट को आगे की प्रक्रिया के लिए संसद में पेश किया जाएगा।
'वन नेशन, वन इलेक्शन' का मतलब है कि देश में Lok Sabha और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं। इस विचार के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि बार-बार चुनाव होने से जो सरकारी खजाने पर बोझ पड़ता है, उसे कम किया जा सके। साथ ही, बार-बार आदर्श आचार संहिता लगने से विकास कार्यों में जो रुकावट आती है, उसे भी दूर किया जा सके।
अनुराग ठाकुर ने बताया कि समिति देशभर में घूम-घूम कर लोगों से राय ले रही है। इसमें सिर्फ राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारी और आम नागरिक भी शामिल हैं। सबका सुझाव लिया जा रहा है ताकि जो भी कानून बने, वह सबके हित में हो। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक दलों को इस विचार से थोड़ी चिंता है। उन्हें लगता है कि अगर एक साथ चुनाव हुए तो शायद राष्ट्रीय मुद्दे ज्यादा हावी हो जाएंगे और क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान कम जाएगा। लेकिन, इसके बावजूद बहुत से लोग इस 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के विचार को अच्छा बता रहे हैं।
यह व्यवस्था लागू होने से सरकारी कर्मचारियों को बार-बार चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाना पड़ेगा। इससे वे अपने नियमित काम पर ध्यान दे पाएंगे। साथ ही, बार-बार चुनाव प्रचार और मतदान की प्रक्रिया में लगने वाले पैसे और समय की भी बचत होगी। यह सब मिलकर देश के विकास में तेजी ला सकता है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि यह व्यवस्था कब और कैसे लागू होगी।