तमिलनाडु में निर्माण सामग्री के परिवहन पर तीन महीने का प्रतिबंध, जानें क्या है वजह

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Navbharat Times
चेन्नई, 28 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने राज्य से पड़ोसी राज्यों में बजरी, कटे हुए पत्थर, एम-रेत, मेटल जेली और अन्य निर्माण सामग्री के परिवहन पर तीन महीने का अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला बढ़ती घरेलू मांग, सामग्री की कमी, कीमतों में उछाल, अवैध खनन और सड़क सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए लिया गया है। भूविज्ञान और खनन विभाग के निदेशक प्रभु शंकर ने यह आदेश जारी किया है। इसका मुख्य उद्देश्य तमिलनाडु में चल रही अवसंरचना और आवास परियोजनाओं के लिए निर्माण सामग्री की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। यह प्रतिबंध पुडुचेरी को छोड़कर सभी पड़ोसी राज्यों पर लागू होगा।

सरकार के मुताबिक, राज्य में सार्वजनिक अवसंरचना और आवास परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन के कारण निर्माण सामग्री की मांग बहुत बढ़ गई है। साथ ही, बजरी, पत्थर, एम-रेत, गिट्टी, चक्की के पत्थर और इसी तरह की अन्य सामग्री की बड़ी मात्रा पड़ोसी राज्यों में भेजी जा रही थी। इस वजह से तमिलनाडु में इनकी कमी हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस असंतुलन के कारण कृत्रिम कमी पैदा हुई, कीमतें बढ़ीं और सरकारी व निजी दोनों तरह के निर्माण कार्यों में रुकावट आई।
इस आदेश में यह भी बताया गया है कि भारी मात्रा में निर्माण सामग्री के परिवहन का सार्वजनिक अवसंरचना पर क्या असर पड़ रहा है। अधिकारियों ने बताया कि निर्माण सामग्री ले जाने वाले भारी ट्रकों और कई पहियों वाले वाहनों की लगातार आवाजाही से स्थानीय सड़कों को काफी नुकसान हुआ है। इससे सड़क दुर्घटनाएं और मौतें भी बढ़ी हैं।

सरकार ने यह भी कहा है कि कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में निर्माण सामग्री की कोई खास कमी नहीं है। इसके बावजूद, तमिलनाडु से बड़ी मात्रा में सामग्री के परिवहन ने राज्य के भीतर मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को और बढ़ा दिया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बढ़ती मांग के कारण अवैध खनन और तय सीमा से ज्यादा खनिजों के निष्कर्षण को बढ़ावा मिला है। इससे पर्यावरण और पारिस्थितिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

सरकार का कहना है कि यह अस्थायी प्रतिबंध प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए लगाया गया है। साथ ही, इसका उद्देश्य तमिलनाडु के भीतर चल रही विकास परियोजनाओं के लिए पर्याप्त मात्रा में सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इस आदेश में सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराएं। संबंधित विभागों को अंतर्राज्यीय चौकियों पर कड़ी निगरानी रखने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि कोई भी अनधिकृत खेप राज्य से बाहर न जाए।

सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि मौजूदा खनन और परिवहन नियमों के तहत, प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कदम राज्य के विकास को गति देने और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है। निर्माण सामग्री की कमी और बढ़ती कीमतों से आम जनता को भी परेशानी हो रही थी, जिसे देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है।

यह प्रतिबंध तीन महीने तक लागू रहेगा, जिसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि इस दौरान राज्य के भीतर निर्माण सामग्री की आपूर्ति सामान्य हो जाए और अवैध खनन पर अंकुश लगे। इस फैसले से स्थानीय निर्माण उद्योगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें अब सामग्री की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

अधिकारियों ने बताया कि एम-रेत (M-sand) का मतलब है मशीन से बनाया गया रेत। यह प्राकृतिक रेत का एक विकल्प है और निर्माण कार्यों में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। बजरी और कटे हुए पत्थर भी निर्माण के लिए बहुत जरूरी सामग्री हैं। इन सभी के परिवहन पर रोक लगाने से राज्य के भीतर इनकी उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

यह कदम सरकार की ओर से पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। अवैध खनन से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि यह भूजल स्तर को भी प्रभावित करता है। इसलिए, इस पर रोक लगाना आवश्यक है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध केवल पड़ोसी राज्यों में निर्यात पर है, राज्य के भीतर निर्माण कार्यों के लिए सामग्री की उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बल्कि, राज्य के भीतर आपूर्ति बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

इस प्रतिबंध का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तमिलनाडु के विकास कार्यों में कोई बाधा न आए और साथ ही राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी हो सके। यह एक संतुलित दृष्टिकोण है जो विकास और पर्यावरण दोनों को ध्यान में रखता है।