पश्चिम बंगाल में सरकारी अस्पतालों में दवाओं की स्टॉक समीक्षा के लिए नई एसओपी लागू

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Navbharat Times
कोलकाता, 28 जुलाई: पश्चिम बंगाल सरकार सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में मरीजों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। स्वास्थ्य विभाग जल्द ही एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू करेगा, जिसके तहत हर हफ्ते सरकारी अस्पतालों में मौजूद दवाओं के स्टॉक की अनिवार्य रूप से जांच की जाएगी। राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. शरद्वत मुखोपाध्याय ने इस नई एसओपी को मंजूरी दे दी है। इसका मुख्य मकसद सरकारी अस्पतालों में एक्सपायर्ड (समाप्त हो चुकी) दवाओं की मौजूदगी और उनके इस्तेमाल को पूरी तरह से रोकना है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद, राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में हर हफ्ते दवाओं के पूरे स्टॉक की बारीकी से जांच होगी। इस दौरान दवाओं की निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यदि कोई दवा 24 घंटे पहले भी एक्सपायर हो चुकी पाई जाती है, तो उसे तुरंत स्टॉक से हटाकर नष्ट कर दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस साप्ताहिक समीक्षा के दौरान अगर किसी अस्पताल में गंभीर लापरवाही सामने आती है या बार-बार एक्सपायर्ड दवाएं रखने का मामला पकड़ा जाता है, तो संबंधित अस्पताल प्रशासन को स्वास्थ्य विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह फैसला पिछले कुछ वर्षों में मिली कई शिकायतों के बाद लिया गया है। इन शिकायतों में यह आरोप लगाया गया था कि सरकारी अस्पतालों में नई माताओं और नवजात शिशुओं को भी एक्सपायर्ड सलाइन और एक्सपायर्ड रिंगर्स लैक्टेट चढ़ाया गया। अधिकारी ने यह भी बताया कि ऐसी शिकायतें भी सामने आई थीं कि सरकारी अस्पतालों से एक्सपायर्ड दवाएं अनधिकृत तरीके से विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों तक पहुंच रही थीं। इससे वहां इलाज करा रहे मरीजों की जान खतरे में पड़ रही थी।

यह नई एसओपी यह सुनिश्चित करेगी कि मरीजों को हमेशा ताजी और सुरक्षित दवाएं ही मिलें। एक्सपायर्ड दवाओं का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है और इससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। इसलिए, स्वास्थ्य विभाग इस मामले को लेकर बहुत गंभीर है और इस नई व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की तैयारी में है। इस कदम से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है और मरीजों का विश्वास भी बढ़ेगा।

अस्पतालों में दवाओं के स्टॉक की नियमित जांच से यह सुनिश्चित होगा कि एक्सपायर्ड दवाएं मरीजों तक न पहुंचें। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। स्वास्थ्य विभाग इस नई प्रक्रिया की निगरानी करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सभी अस्पताल इसका पालन करें। यदि कोई अस्पताल इस नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह पहल सरकारी अस्पतालों में दवाओं के प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाएगी।