के. एस. चित्रा ने जन्मदिन पर मिले प्यार के लिए फैंस का जताया आभार, 'केरल की कोकिला' ने साझा की भावुक पोस्ट

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Navbharat Times
मुंबई, 28 जुलाई। भारतीय संगीत की जानी-मानी गायिका के. एस. चित्रा, जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ से लाखों दिलों को जीता है, ने हाल ही में अपने जन्मदिन पर मिले प्यार और शुभकामनाओं के लिए सोशल मीडिया पर सभी का दिल से आभार व्यक्त किया है। 27 जुलाई को अपना जन्मदिन मनाने वाली चित्रा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक खास पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने फैंस, परिवार, दोस्तों और शुभचिंतकों को उनके स्नेह, आशीर्वाद और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि लोगों का यह प्यार और समर्थन उनके जीवन का सबसे बड़ा खजाना है।

चित्रा ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मेरा दिल कृतज्ञता से भरा हुआ है। दुनिया भर से मिले जन्मदिन की शुभकामनाओं, आशीर्वाद, प्यार और प्रार्थनाओं के लिए मैं आप सभी का दिल से धन्यवाद करती हूं। आपका हर मैसेज, हर फोन कॉल और हर खूबसूरत शुभकामनाओं ने मेरे दिल को गहराई से छुआ है। आपका स्नेह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा आशीर्वाद है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं अपने प्रशंसकों के साथ-साथ दोस्तों, परिवार, शुभचिंतकों और मीडिया से जुड़े लोगों का भी धन्यवाद करती हूं। इन सभी ने मेरे जन्मदिन को खास बना दिया। ईश्वर आप सभी को खुशियां, अच्छा स्वास्थ्य, शांति और आनंद प्रदान करें। आप सभी के लिए ढेर सारा प्यार और आभार।”
के. एस. चित्रा का संगीत सफर मलयालम संगीतकार एम. जी. राधाकृष्णन के साथ 1979 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने चित्रा की आवाज़ को पहली बार रिकॉर्ड किया। इसके बाद, 1982 में आई फिल्म ‘केलकथा शब्दम’ से उनके प्लेबैक सिंगिंग करियर की आधिकारिक शुरुआत हुई और तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी जैसी कई भारतीय भाषाओं में हजारों यादगार गाने गाए हैं। उनकी आवाज़ की मिठास और गायकी के अंदाज़ ने उन्हें 'केरल की कोकिला' और 'लिटिल नाइटिंगेल ऑफ इंडिया' जैसे सम्मानजनक नामों से नवाज़ा है।

संगीत की दुनिया के बड़े नामों के साथ काम करने का अनुभव भी चित्रा के पास है। उन्होंने ए. आर. रहमान, इलैयाराजा, एम. एम. कीरवानी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ मिलकर कई बेहतरीन गाने दिए हैं। हिंदी सिनेमा में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है। फिल्म ‘बॉम्बे’ का उनका गाया हुआ गाना ‘कहना ही क्या’ आज भी लोगों की ज़ुबान पर है और काफी लोकप्रिय है।

चित्रा के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में छह नेशनल फिल्म अवॉर्ड शामिल हैं। इसके अलावा, उन्हें कई फिल्मफेयर अवॉर्ड, राज्य सरकारों के पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है। उन्हें भारत सरकार द्वारा साल 2005 में पद्म श्री और 2021 में पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मान भी मिले हैं। संगीत के क्षेत्र में उनकी प्रतिभा का एक और प्रमाण यह है कि उन्होंने साल 2001 में लंदन के मशहूर रॉयल अल्बर्ट हॉल में भी अपनी प्रस्तुति दी थी। यह उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का एक महत्वपूर्ण पल था।

चित्रा की गायकी की शुरुआत 1979 में एम. जी. राधाकृष्णन के साथ हुई थी। यह उनके लिए एक बड़ा मौका था। इसके बाद, 1982 में फिल्म ‘केलकथा शब्दम’ से उन्होंने प्लेबैक सिंगर के तौर पर अपना करियर शुरू किया। इस फिल्म के बाद, उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने कई भाषाओं में गाने गाए और अपनी आवाज़ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी आवाज़ इतनी खास थी कि लोग उन्हें 'केरल की कोकिला' कहने लगे। यह नाम उनकी मधुर आवाज़ का प्रतीक बन गया।

उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी कई हिट गाने दिए हैं। फिल्म ‘बॉम्बे’ का गाना ‘कहना ही क्या’ इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। यह गाना आज भी बहुत सुना जाता है। चित्रा को संगीत की दुनिया में उनके योगदान के लिए कई बड़े पुरस्कार मिले हैं। छह नेशनल फिल्म अवॉर्ड उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से हैं। इसके अलावा, उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे सम्मान भी मिले हैं, जो भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से हैं। साल 2001 में रॉयल अल्बर्ट हॉल में उनका प्रदर्शन उनकी कला की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।