बांकीपुर उपचुनाव: भाजपा, राजद और जन सुराज के बीच त्रिकोणीय मुकाबला, 30 जुलाई को मतदान

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पटना, 28 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव के लिए मंगलवार शाम चुनाव प्रचार थम जाएगा। इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जन सुराज के बीच है। भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को, राजद ने रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है, जबकि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पहली बार खुद मैदान में उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं। यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं करेगा, बल्कि बिहार की बदलती राजनीति और दलों की संगठनात्मक क्षमता की परीक्षा भी होगा। चुनाव परिणाम 3 अगस्त को मतगणना के बाद घोषित किए जाएंगे।

मंगलवार शाम प्रचार थमने के साथ ही सभी राजनीतिक दलों का पूरा जोर अब घर-घर जाकर संपर्क साधने और बूथ प्रबंधन पर होगा। सोमवार को राजधानी पटना की सड़कों पर चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर दिखी। भाजपा और राजद ने अपने शक्ति प्रदर्शन के लिए भव्य रोड शो निकाले, वहीं जन सुराज के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न इलाकों में जनसंपर्क अभियान चलाकर मतदाताओं से अपने पक्ष में वोट देने की अपील की। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक चलेगा। जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सभी मतदान केंद्रों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है। मतदाताओं और प्रत्याशियों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
यह बांकीपुर उपचुनाव कई मायनों में खास है। इसे न केवल एक विधानसभा सीट के लिए मुकाबला माना जा रहा है, बल्कि बिहार की राजनीतिक दिशा और दलों की संगठनात्मक ताकत की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। यही वजह है कि सभी प्रमुख दलों ने अपने प्रचार अभियान में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री विजय कुमार सिन्हा, केंद्रीय मंत्री और भाजपा व एनडीए के वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के पक्ष में लगातार चुनाव प्रचार किया। दूसरी ओर, राजद नेता तेजस्वी यादव भी पिछले दो दिनों से चुनावी माहौल को राजद के पक्ष में बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी लगातार क्षेत्र में जनसंपर्क कर मतदाताओं को अपने पाले में लाने का प्रयास किया।

बांकीपुर सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। पूर्व मंत्री नितिन नवीन यहां से लगातार पांच बार विधायक चुने गए थे। उनके राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह सीट खाली हुई, जिसके कारण उपचुनाव हो रहा है। भाजपा इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखना चाहती है। वहीं, राजद इस उपचुनाव को सत्ता पक्ष के खिलाफ जनमत के रूप में पेश करने की कोशिश में है। दूसरी ओर, प्रशांत किशोर की चुनावी मैदान में सीधी मौजूदगी ने इस मुकाबले को पारंपरिक द्विध्रुवीय राजनीति से अलग एक नया आयाम दे दिया है। प्रशांत किशोर जनसुराज को एक विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं, जो सत्ता पक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

चुनाव प्रचार समाप्त होने के साथ ही अब सभी दलों की नजरें बूथ स्तर की रणनीति और मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने पर टिकी होंगी। राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर उत्सुकता बनी हुई है कि बांकीपुर की जनता इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में किस उम्मीदवार के पक्ष में अपना फैसला सुनाती है। चुनाव परिणाम 3 अगस्त को मतगणना के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि भाजपा अपना गढ़ बचाने में सफल रहती है या विपक्ष या जन सुराज कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर करने में कामयाब होते हैं।

इस उपचुनाव में मुख्य लड़ाई भाजपा, राजद और जन सुराज के बीच मानी जा रही है। भाजपा ने इस प्रतिष्ठित सीट पर नीरज कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, राजद ने रेखा गुप्ता को एक बार फिर मैदान में उतारा है, जो पहले भी इस सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं। चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का पहली बार स्वयं चुनाव लड़ना इस मुकाबले को और अधिक दिलचस्प बना रहा है। उनकी उपस्थिति ने इस सीट पर पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट के परिणाम से कहीं बढ़कर है। यह बिहार की बदलती राजनीतिक हवा का संकेत भी दे सकता है। साथ ही, यह विभिन्न दलों की जमीनी स्तर पर संगठनात्मक क्षमता की भी परीक्षा लेगा। यही कारण है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

भाजपा के पक्ष में प्रचार के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री विजय कुमार सिन्हा, केंद्रीय मंत्री और भाजपा व एनडीए के कई वरिष्ठ नेता लगातार बांकीपुर में सक्रिय रहे। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के लिए वोट मांगे। दूसरी ओर, राजद के प्रमुख नेता तेजस्वी यादव ने भी पिछले दो दिनों में चुनावी माहौल को राजद के पक्ष में करने का भरपूर प्रयास किया। उन्होंने जनसभाओं को संबोधित किया और मतदाताओं से समर्थन की अपील की। जन सुराज की ओर से प्रशांत किशोर ने भी लगातार क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चलाया और मतदाताओं को अपने विजन से जोड़ने की कोशिश की।

बांकीपुर सीट का इतिहास भी काफी महत्वपूर्ण है। यह सीट लंबे समय से भाजपा का एक मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। पूर्व मंत्री नितिन नवीन यहां से लगातार पांच बार विधायक चुने गए थे। उनके राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह सीट खाली हुई, जिसके कारण उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा इस सीट को अपने पास बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। वहीं, राजद इस सीट को जीतकर सत्ता पक्ष के खिलाफ एक मजबूत जनमत तैयार करने की फिराक में है। प्रशांत किशोर की एंट्री ने इस मुकाबले को एक नया आयाम दिया है, जो पारंपरिक भाजपा बनाम राजद की लड़ाई से हटकर है। प्रशांत किशोर जनसुराज को एक नए राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं, जो मौजूदा सत्ता पक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती है।

चुनाव प्रचार के समाप्त होने के साथ ही अब सभी दलों की निगाहें बूथ स्तर की रणनीति पर होंगी। मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाना और यह सुनिश्चित करना कि वे भाजपा, राजद या जन सुराज के पक्ष में मतदान करें, यह सभी दलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य होगा। राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर काफी उत्सुकता है कि बांकीपुर की जनता इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में किस उम्मीदवार को अपना समर्थन देती है। 3 अगस्त को मतगणना के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि भाजपा अपना अभेद्य किला बचाने में कामयाब होती है या फिर विपक्ष या जन सुराज कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर करने में सफल होते हैं। यह परिणाम बिहार की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।