राम कपूर का खुलासा: मां बहन 5 साल से बात नहीं करते, पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने में की मदद
राम कपूर का खुलासा: मां-बहन 5 साल से बात नहीं करते, पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने में की मदद
NewsPoint•
मुंबई, 28 जुलाई। अभिनेता राम कपूर ने रियलिटी शो ‘लॉक अप: सच या सजा’ के एक हालिया एपिसोड में अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक बेहद भावुक खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उनकी मां और बहन पिछले पांच सालों से उनसे बात नहीं कर रही हैं। शो में ‘फादर’ शब्द के आने के बाद राम कपूर ने यह दर्दनाक राज खोला कि उन्होंने अपने पिता की आखिरी इच्छा पूरी करने में उनकी मदद की थी।
राम कपूर ने बताया कि उनके और उनके पिता के रिश्ते कभी भी अच्छे नहीं रहे। उनके बीच हमेशा दूरियां और अनबन रही। राम ने अपनी जिंदगी अपने तरीके से जी, जबकि बाकी परिवार हमेशा पिता के साथ रहा। कोविड महामारी के दौरान उनके पिता को दोबारा कैंसर हो गया था। तब पिता ने गौतमी को फोन करके कहा था कि वे राम से बात करना चाहते हैं। इसके बाद राम और उनके पिता के बीच फोन पर बातचीत शुरू हुई।राम कपूर ने बताया कि उनके पिता ने यह तय कर लिया था कि वे अब और जीना नहीं चाहते थे। लेकिन वे यह कदम अकेले उठाने से डर रहे थे। वे नहीं चाहते थे कि इस बारे में किसी को पता चले। किसी वजह से उन्हें लगा कि उन्हें राम की जरूरत है। राम कपूर के मुताबिक, उनके पिता ने उनसे पूछा था, "क्या तुम मेरी मरने में मदद कर सकते हो?" राम ने तुरंत जवाब दिया, "आप क्या बात कर रहे हैं?" लेकिन उनके पिता ने उन्हें समझा लिया कि अगर राम उनकी मदद नहीं करेंगे, तो वे अकेले मर जाएंगे।
राम कपूर ने बताया कि उनके पिता चाहते थे कि वे आखिरी समय तक आईसीयू में उनके साथ रहें। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी अंतिम यात्रा के दौरान कोई रोए नहीं और उनका अंतिम संस्कार (या दफन) उसी दिन कर दिया जाए। राम ने कहा, "किसी तरह मैंने हर दिन उनका हाथ थामा और उन्हें जाने दिया।" उन्होंने आगे कहा, "मेरी मां और मेरी बहन आज भी मुझसे बात नहीं करती हैं। इस बात को पांच साल से ज्यादा समय हो चुका है।" राम को लगता है कि एक संतान अपने माता-पिता के लिए इससे बड़ा काम शायद ही कुछ कर सकती है। उन्होंने कहा कि हर कोई अपनी जिंदगी में राजा की तरह जीता है, लेकिन उनके पिता ने विदाई भी राजा की तरह ली।
इस बातचीत के दौरान अभिनेता काफी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्हें अब मौत से डर नहीं लगता, क्योंकि उन्होंने उसे बहुत करीब से देखा है। यह खुलासा राम कपूर के जीवन के एक बेहद कठिन और भावनात्मक दौर को दर्शाता है, जब उन्होंने अपने पिता की अंतिम इच्छाओं को पूरा करने का मुश्किल फैसला लिया, भले ही इसके लिए उन्हें अपने परिवार के बाकी सदस्यों से दूरी का सामना करना पड़ा। यह घटना उनके पिता के प्रति उनके गहरे प्रेम और सम्मान को भी दर्शाती है। राम कपूर ने जिस तरह से अपने पिता के अंतिम पलों में उनका साथ दिया, वह एक मिसाल है। उन्होंने न केवल अपने पिता की शारीरिक तकलीफ को कम करने की कोशिश की, बल्कि उनकी मानसिक शांति का भी ध्यान रखा। यह सब करते हुए उन्होंने अपने पिता की गरिमा को बनाए रखा। यह एक ऐसा अनुभव था जिसने राम कपूर को अंदर से बदल दिया। उन्होंने मौत को इतने करीब से देखा कि अब उन्हें उसका कोई डर नहीं रहा। यह उनके जीवन का एक ऐसा अध्याय है जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे।