केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह: फ्री ट्रेड और माइग्रेशन समझौते से युवाओं को विदेश में मिलेंगे रोजगार के नए अवसर

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 29 जून। केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सोमवार को बताया कि भारत सरकार ने कई देशों के साथ फ्री ट्रेड और माइग्रेशन एंड मोबिलिटी समझौते किए हैं। इन समझौतों से देश के युवाओं को विदेशों में नौकरी के नए और सुरक्षित अवसर मिलेंगे। कुशल युवा, नर्स, तकनीशियन, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, बढ़ई और अन्य प्रशिक्षित पेशेवर अब कानूनी तरीके से विदेश जाकर काम कर सकेंगे। उन्हें आसान वीजा प्रक्रिया, सरकारी निगरानी और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के नेतृत्व में उठाया गया है, जिसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार में बेहतर अवसर दिलाना है।

कीर्ति वर्धन सिंह ने विस्तार से बताते हुए कहा कि इन समझौतों के तहत, भारतीय युवाओं को एक व्यवस्थित और सुरक्षित प्रक्रिया के माध्यम से विदेशों में रोजगार मिलेगा। अभी लाखों भारतीय, खासकर केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों से, खाड़ी देशों में काम करते हैं। करीब 90 लाख भारतीय खाड़ी देशों में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। लेकिन, अक्सर वे निजी एजेंटों के माध्यम से जाते हैं, जिससे उन्हें वीजा संबंधी समस्याएं, आर्थिक शोषण और धोखाधड़ी का सामना करना पड़ता है। कई लोग विदेश जाने के लिए अपनी जमीन बेच देते हैं, कर्ज लेते हैं या भारी रकम खर्च करते हैं। गैर-पंजीकृत एजेंट उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर मोटी रकम वसूलते हैं।
नए माइग्रेशन एंड मोबिलिटी समझौते इस स्थिति को काफी हद तक बदल देंगे। यूरोपीय संघ, जर्मनी, रूस, न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ हुए समझौतों के तहत, भारत के कुशल युवाओं को एक औपचारिक और पारदर्शी प्रक्रिया से वीजा मिलेगा। उन्हें किसी अवैध एजेंट या फर्जी दस्तावेजों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। भारत सरकार के पास विदेश जाने वाले हर व्यक्ति का पूरा रिकॉर्ड होगा। इससे भारतीय दूतावास और मिशन विदेशों में उनके हितों की निगरानी कर सकेंगे।

केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि यदि किसी भारतीय नागरिक के साथ विदेश में किसी प्रकार की धोखाधड़ी, शोषण या अन्य समस्या होती है, तो सरकार उसके हितों की बेहतर तरीके से रक्षा कर सकेगी। इससे भारतीय कामगारों की सुरक्षा बढ़ेगी और उन्हें सम्मानजनक वातावरण में रोजगार मिलेगा। सरकार सिर्फ विदेश भेजने की व्यवस्था ही नहीं कर रही है, बल्कि युवाओं को रोजगार योग्य बनाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट में कौशल विकास के लिए बड़े पैमाने पर प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत डिजिटल तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, प्लंबिंग, मशीन संचालन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुसार तैयार करना है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

कीर्ति वर्धन सिंह का मानना है कि प्रशिक्षित और प्रमाणित युवा न केवल बेहतर रोजगार हासिल करेंगे, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि इन समझौतों से संबंधित कागजी प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी और इसका लाभ युवाओं को मिलना शुरू हो जाएगा। सरकार का लक्ष्य देश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना और सुरक्षित तरीके से वैश्विक अवसरों तक पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि "Union Minister कीर्ति वर्धन सिंह ने Monday को से बातचीत के दौरान कहा कि केंद्र Government द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार (फ्री ट्रेड) और माइग्रेशन एंड मोबिलिटी समझौते देश के युवाओं के लिए विदेशों में रोजगार के नए अवसर लेकर आने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इन समझौतों के लागू होने के बाद कुशल युवाओं, नर्सों, तकनीशियनों, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, बढ़ई और अन्य प्रशिक्षित पेशेवरों को कानूनी और सुरक्षित तरीके से विदेशों में नौकरी करने का अवसर मिलेगा। साथ ही उन्हें आसान वीजा प्रक्रिया, सरकारी निगरानी और प्रशिक्षण जैसी सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा।"

उन्होंने आगे कहा कि "कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के नेतृत्व में India ने कई देशों के साथ महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। इन समझौतों का एक अहम हिस्सा ‘माइग्रेशन एंड मोबिलिटी एग्रीमेंट’ है, जिसके माध्यम से भारतीय युवाओं के लिए विदेशों में रोजगार के रास्ते अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाए जाएंगे।"

मंत्री ने यह भी बताया कि "वर्तमान समय में देश के लाखों लोग रोजगार के लिए विदेश जाते हैं। विशेष रूप से केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों के बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, करीब 90 लाख भारतीय खाड़ी देशों में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं, हालांकि अभी बड़ी संख्या में लोग निजी एजेंटों के माध्यम से विदेश जाते हैं, जहां उन्हें वीजा संबंधी समस्याओं, आर्थिक शोषण और धोखाधड़ी जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।"

उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि "Union Minister ने कहा कि कई लोग विदेश जाने के लिए अपनी जमीन बेच देते हैं, कर्ज लेते हैं या भारी रकम खर्च करते हैं। कई बार गैर-पंजीकृत एजेंट उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे मोटी रकम वसूलते हैं। उन्होंने कहा कि नए माइग्रेशन एंड मोबिलिटी समझौतों के लागू होने के बाद यह व्यवस्था काफी हद तक बदल जाएगी।"

कीर्ति वर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि "उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ, जर्मनी, रूस, न्यूजीलैंड समेत कई देशों के साथ हुए समझौतों के तहत India के कुशल युवाओं को एक औपचारिक और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से वीजा मिलेगा। इससे उन्हें किसी अवैध एजेंट या फर्जी दस्तावेजों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। विदेश जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पूरा रिकॉर्ड India Government के पास रहेगा, जिससे भारतीय दूतावास और मिशन विदेशों में उनके हितों की निगरानी कर सकेंगे।"

अंत में, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि यदि किसी भारतीय नागरिक के साथ विदेश में किसी प्रकार की धोखाधड़ी, शोषण या अन्य समस्या होती है तो Government उसके हितों की बेहतर तरीके से रक्षा कर सकेगी। इससे भारतीय कामगारों की सुरक्षा भी बढ़ेगी और उन्हें सम्मानजनक वातावरण में रोजगार मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि Government केवल विदेश भेजने की व्यवस्था ही नहीं कर रही है, बल्कि युवाओं को रोजगार योग्य बनाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। केंद्रीय बजट में कौशल विकास के लिए बड़े स्तर पर प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत डिजिटल तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, प्लंबिंग, मशीन संचालन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुसार तैयार करना है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। उनका मानना है कि प्रशिक्षित और प्रमाणित युवा न केवल बेहतर रोजगार हासिल करेंगे, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि इन समझौतों से संबंधित कागजी प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी और इसका लाभ युवाओं को मिलना शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि Government का लक्ष्य देश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना और सुरक्षित तरीके से वैश्विक अवसरों तक पहुंचाना है। – पीआईएम/"