महीसागर में 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' से हजारों निरक्षर हुए साक्षर, महिलाओं ने सीखी नई जिंदगी

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महीसागर, 29 जून (आईएएनएस)। गुजरात के महीसागर जिले में 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' के तहत चलाए गए एक सफल अभियान ने हजारों ग्रामीण महिलाओं को साक्षर बनाया है। जिला प्रशासन की इस पहल से महिलाएं अब न केवल पढ़-लिख सकती हैं, बल्कि बैंक, पोस्ट ऑफिस और डेयरी जैसे रोजमर्रा के कामों को भी खुद करने लगी हैं। इस अभियान के पहले चरण में 4,135 निरक्षर लोग परीक्षा पास कर चुके हैं और जल्द ही उन्हें भारत सरकार की ओर से सर्टिफिकेट भी मिलेगा। यह सफलता प्रशासन, शिक्षकों, विद्यार्थियों और समाज की सामूहिक भागीदारी का जीता-जागता प्रमाण है।

महीसागर जिले में निरक्षरता को मिटाने के लिए 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' के तहत एक ज़बरदस्त लिटरेसी कैंपेन चलाया गया। इस अभियान का पहला चरण पूरा हो चुका है और इसके नतीजे बेहद शानदार रहे हैं। जिले की हजारों ग्रामीण महिलाएं, जो कभी सिर्फ अंगूठा लगाना जानती थीं, अब पढ़-लिख सकती हैं और अपने रोज़मर्रा के काम खुद कर सकती हैं। यह सब संभव हुआ है जिला प्रशासन की मेहनत और भारत सरकार के इस खास कार्यक्रम की वजह से। इस अभियान ने न केवल निरक्षरता के अंधेरे को दूर किया है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बनाया है।
अभियान में हिस्सा लेने वाली मगूबेन ने अपनी खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा, "पहले मुझे अंगूठा लगाने आता था। आज साइन करना सीख लिया। टीचर आते हैं, जो कई प्रकार की शिक्षा देते हैं जिसके कारण हमने तीन बार परीक्षा पास किया। हम इतनी उम्र में साइन करना सीख गए हैं; इसके लिए हम बहुत खुश हैं।" इसी तरह, भारतीबेन ने बताया कि उन्हें घड़ी देखना और 100 तक गिनती सीखने में दिक्कत होती थी, लेकिन अब उन्होंने यह सब सीख लिया है। उन्होंने कहा, "मुझे घड़ी देखने और 100 तक गिनती सीखने में कठिनाई हो रही थी। बच्चों ने ये दोनों चीजें सिखाई हैं। अब मैं घड़ी देखना और एक से 100 तक गिनती बोलना सीख गई हूं। इसके साथ ही डेरी में दूध भरते समय दी जाने वाली पर्ची को देखना भी आ गया है।"

महीसागर जिले में कुल 717 गांव हैं। पिछले साल, 2025 में, ऐसे गांवों का सर्वे किया गया था जहाँ 60 प्रतिशत से कम महिला साक्षरता थी। ऐसे कुल 4,697 निरक्षर लोगों की पहचान की गई जिन्हें पढ़ाना था। इन लोगों को 126 शिक्षकों की देखरेख में 532 विद्यार्थियों ने करीब 6 महीने तक पढ़ाया। खास बात यह है कि ये क्लासें अक्सर रात में, जब महिलाएं घर के काम निपटाकर फ्री होती थीं, तब आयोजित की जाती थीं। महीसागर के पाखी, पट्टन, लिबोदरा और राणपुर जैसे कई गांवों में रात साढ़े सात से साढ़े आठ बजे के बीच क्लासें लगती थीं। इस पहले चरण में कुल 4,561 लोगों ने मार्च में परीक्षा दी, जिसमें से 4,135 लोग सफल हुए। इन सफल लोगों को भारत सरकार की ओर से सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

महीसागर की जिला कलेक्टर, अर्पित सागर, ने इस अभियान की सफलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बच्चों ने बहुत मेहनत की और बहनों (महिलाओं) के फ्री होने के समय, यानी रात 7:30 से 8:30 बजे, उन्हें पढ़ाया। उन्होंने सिर्फ लिखना-पढ़ना ही नहीं सिखाया, बल्कि बैंक में कैसे काम करना है, यह भी सिखाया। कलेक्टर ने महिलाओं के उत्साह की भी खूब तारीफ की। उन्होंने कहा, "बच्चों ने रात 7:30 से 8:30 बजे, जिस टाइम बहनें (पढ़ाई करने वाली महिलाएं) फ्री होती हैं, उस टाइम उनको पढ़ाया। बैंक में कैसे काम करना है, यह भी सिखाया। लिखना और पढ़ना सिखाया। सबसे अच्छी बात यह है कि महिलाओं ने काफी उत्साह से इस अभियान में हिस्सा लिया।"

अब इस अभियान का दूसरा चरण शुरू होने वाला है। इस बार उन गांवों पर ध्यान दिया जाएगा जहाँ महिलाओं की साक्षरता दर 60 प्रतिशत से ज़्यादा है। इसके बाद 15 जुलाई से 15 अक्टूबर तक कक्षाएं चलेंगी। मार्च तक इन लोगों को परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार कराया जाएगा। महीसागर को 100 प्रतिशत साक्षर बनाने के लक्ष्य के साथ 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' का दूसरा चरण चलाया जाएगा। इसमें बाकी बचे 347 गांवों में सर्वे करके निरक्षरों को पढ़ाने का अभियान चलाया जाएगा। यह सफलता दिखाती है कि अगर प्रशासन, शिक्षक, विद्यार्थी और पूरा समाज मिलकर काम करे, तो निरक्षरता जैसी बड़ी समस्या को भी जड़ से खत्म किया जा सकता है।