सीबीएसई की नई त्रिभाषा नीति: कक्षा 10 के छात्रों के लिए कोई बदलाव नहीं, जानें क्या हैं दिशा निर्देश
सीबीएसई की नई त्रिभाषा नीति: कक्षा 10 के छात्रों के लिए कोई बदलाव नहीं, जानें क्या हैं दिशा-निर्देश
NewsPoint•
नई दिल्ली, 29 जून। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत त्रिभाषा नीति को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस नई व्यवस्था के तहत, विद्यार्थियों को कम से कम दो भारतीय भाषाएं सीखनी होंगी, जबकि तीसरी भाषा भारतीय या विदेशी कोई भी हो सकती है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और बहुभाषी कौशल विकसित करना है। सबसे बड़ी राहत वर्तमान कक्षा 10 के छात्रों को दी गई है, जिनके लिए इस सत्र में कोई बदलाव नहीं होगा और वे दो भाषाओं के साथ ही अपनी पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा पूरी करेंगे। यह नई व्यवस्था वर्तमान कक्षा 6 के विद्यार्थियों और उसके बाद आने वाले बैचों पर पूरी तरह लागू होगी, जिनमें तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा भी शामिल होगी।
सीबीएसई ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप त्रिभाषा नीति को लागू करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस नई नीति के तहत, विद्यार्थियों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा। इनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी अनिवार्य हैं। तीसरी भाषा के रूप में विद्यार्थी या तो कोई अन्य भारतीय भाषा चुन सकते हैं या फिर कोई विदेशी भाषा, बशर्ते कि पहली दो भाषाएं भारतीय ही हों। बोर्ड का कहना है कि इस बदलाव का मकसद छात्रों पर कोई अतिरिक्त दबाव डालना नहीं है, बल्कि भारतीय भाषाओं के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें कई भाषाएं बोलने में माहिर बनाना है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी छात्र को इस बदलाव से कोई नुकसान न हो।वर्तमान कक्षा 10 के छात्रों को इस नई व्यवस्था से फिलहाल कोई लेना-देना नहीं है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में जो छात्र कक्षा 10 में होंगे, उनके लिए कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। वे पहले की तरह ही केवल दो भाषाओं के साथ अपनी पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा पूरी करेंगे। इस बैच को तीसरी भाषा पढ़ने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। यह एक बड़ी राहत है उन छात्रों के लिए जो पहले से ही अपनी पढ़ाई के अंतिम चरण में हैं।
वहीं, वर्तमान कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए नई व्यवस्था लागू होगी। उन्हें तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी। यदि कोई छात्र पहले से ही दो भारतीय भाषाएं पढ़ रहा है, तो वह तीसरी भाषा के रूप में किसी अन्य भारतीय भाषा या फिर अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन जैसी कोई विदेशी भाषा चुन सकता है। लेकिन, अगर कोई छात्र एक भारतीय भाषा और एक विदेशी भाषा पढ़ रहा है, तो उसे तीसरी भाषा के रूप में किसी भारतीय भाषा का ही चयन करना होगा।
सीबीएसई ने वर्तमान कक्षा 9 के उन विद्यार्थियों को एक विशेष छूट दी है जो पहले से ही अंग्रेजी और फ्रेंच जैसी दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं। ऐसे छात्रों को अपनी दोनों विदेशी भाषाओं को जारी रखने की अनुमति होगी। हालांकि, उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी। इन छात्रों के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि तीसरी भाषा की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर आंतरिक आकलन के माध्यम से किया जाएगा। जब यह बैच 2027-28 में कक्षा 10 में पहुंचेगा, तब भी तीसरी भाषा के लिए सीबीएसई बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं करेगा।
वर्तमान कक्षा 7 और 8 के विद्यार्थियों के लिए भी लगभग यही व्यवस्था लागू होगी। जब ये छात्र कक्षा 9 और 10 में पहुंचेंगे, तब उन्हें तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। यदि उन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुन रखी हैं, तो उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा जोड़नी होगी। इन बैचों के लिए भी तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल विद्यालय स्तर पर होगा और कक्षा 10 में इसकी बोर्ड परीक्षा नहीं ली जाएगी।
नई व्यवस्था का पूरा स्वरूप वर्तमान कक्षा 6 के मौजूदा विद्यार्थियों और उसके बाद आने वाले बैचों पर लागू होगा। इन छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। जब ये विद्यार्थी कक्षा 10 तक पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा भी देंगे। इस दिशा में, एनसीईआरटी ने 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में विशेष पाठ्यपुस्तकें तैयार की हैं, जिन्हें धीरे-धीरे उपलब्ध कराया जा रहा है।
सीबीएसई ने कुछ खास श्रेणियों के विद्यार्थियों को विशेष छूट भी दी है। दिव्यांग विद्यार्थियों को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक रियायतें और छूट मिलेंगी। विदेशों में संचालित सीबीएसई विद्यालयों को तीसरी भारतीय भाषा पढ़ाने की अनिवार्यता से पूरी तरह छूट दी गई है। विदेश से भारत लौटने वाले विदेशी छात्रों को भी तीसरी भारतीय भाषा पढ़ने से मुक्त रखा गया है।
यदि किसी छात्र के माता-पिता या अभिभावक किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित हो जाते हैं, तो छात्र अपनी पहले से चुनी गई भाषा व्यवस्था को जारी रख सकेगा। ऐसे मामलों में स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्र की पढ़ाई प्रभावित न हो और उन्हें आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
बोर्ड ने स्कूलों को भाषा शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लचीली व्यवस्था अपनाने की अनुमति दी है। स्कूल जरूरत पड़ने पर वर्तमान शिक्षकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों, स्नातकोत्तर योग्यताधारी व्यक्तियों, विद्यालय समूहों के बीच शिक्षक साझाकरण और ऑनलाइन एवं हाइब्रिड शिक्षण का उपयोग कर सकेंगे। इसका मतलब है कि शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए कई तरह के विकल्प खुले रखे गए हैं।
सीबीएसई का कहना है कि नई भाषा नीति का मुख्य केंद्र परीक्षा नहीं, बल्कि सीखना है। विद्यार्थियों को रटने के बजाय चीजों को समझने, भाषा के व्यावहारिक उपयोग और आनंददायक शिक्षण अनुभव पर ध्यान दिया जाएगा। बोर्ड और एनसीईआरटी विद्यार्थियों के लिए उनकी उम्र और कक्षा के अनुसार अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराएंगे, ताकि नई भाषा सीखना आसान और रोचक बन सके।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप किए जा रहे ये बदलाव छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर लागू किए जा रहे हैं। किसी भी विद्यार्थी को इस दौरान नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। सीबीएसई का मानना है कि बहुभाषी दक्षता न केवल छात्रों की शैक्षणिक क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें भारतीय भाषाओं, संस्कृति और विविधता से भी गहराई से जोड़ने में मदद करेगी। यह नीति भारत की समृद्ध भाषाई विरासत को संरक्षित करने और उसे बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।