अमित शाह के बयान पर बिहार में एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया, क्या कांग्रेस का अस्तित्व रोहिंग्या घुसपैठियों पर निर्भर है?
अमित शाह के बयान पर बिहार में एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया, क्या कांग्रेस का अस्तित्व रोहिंग्या घुसपैठियों पर निर्भर है?
NewsPoint•
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि विपक्षी दल एसआईआर का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि अवैध घुसपैठिए उनका वोट बैंक बने हुए हैं। इस पर बिहार के एनडीए के नेताओं ने जोरदार प्रतिक्रिया दी है। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने अमित शाह के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि क्या कांग्रेस का पूरा अस्तित्व सिर्फ रोहिंग्या और अवैध घुसपैठियों के फर्जी वोटों पर टिका है? उन्होंने यह भी बताया कि अमित शाह बार-बार यही बात कह रहे हैं लेकिन विपक्ष को यह सुनाई नहीं दे रहा है।
संजय सरावगी ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों में खुद एसआईआर को सही बताया जा रहा है। कर्नाटक और केरल में कांग्रेस की सरकारें हैं। कर्नाटक में एक करोड़ नाम हटाए गए हैं और वहां के वरिष्ठ मंत्री खुद कहते हैं कि हमारे यहां एसआईआर सही हुआ है। केरल के मंत्री भी यही बात कर रहे हैं। लेकिन वही लोग दिल्ली में बैठकर हो-हल्ला कर रहे हैं। उन्होंने यह प्रश्न उठाया, "क्या कांग्रेस का पूरा अस्तित्व केवल रोहिंग्या और अवैध घुसपैठियों के फर्जी वोटों पर टिका है?" सरावगी ने बताया कि गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि तीन करोड़ फर्जी, मृत और अवैध घुसपैठियों के बोगस नामों को वोटर लिस्ट से हटाया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि जिन लोगों के नाम हटे हैं, वे या तो मृत थे, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए थे या फिर उनका नाम दो जगह दर्ज था। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष एक भी ऐसा व्यक्ति सामने नहीं ला सका जो कह सके कि वह जीवित मतदाता है या उसका नाम गलत तरीके से काटा गया है। यह सब विपक्ष द्वारा फैलाया जा रहा झूठा नैरेटिव है और जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।
एक और बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने भी अमित शाह के बयान को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान तीन करोड़ ऐसे लोग मिले हैं जिन्होंने अवैध तरीके से देश में अपना नाम जुड़वाकर संसाधनों का लाभ उठाया। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होना जरूरी है। उन्होंने कहा, "खाएगा हमारा और गाएगा दूसरा, ऐसा नहीं चल सकता। कुछ विदेशी ताकतें घुसपैठियों के जरिए देश में अव्यवस्था फैलाने की कोशिश कर रही हैं। इसीलिए गृह मंत्री ने ऐसे लोगों को चुन-चुन कर बाहर निकालने का काम किया है।"
वहीं, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा कि यह सवाल राहुल गांधी या अमित शाह का नहीं है, बल्कि सरकार के कार्यप्रणाली का है। अगर कोई अवैध तरीके से बाहर से आकर अपना नाम रजिस्टर्ड करा लेता है, तो यह कहीं न कहीं आपके अधिकारियों और निर्वाचन से जुड़े लोगों की गलती है। उन्होंने कहा कि अब गलतियों को ढूंढने की कोई जरूरत नहीं है। जो गलत हो, उसे हटाना चाहिए और जो सही हो, उसकी फिर से एंट्री होनी चाहिए।
श्याम रजक ने कहा कि भाषण देकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। यह सीधी बात है कि जो गलत है, वह गलत है और जो सही है, वह सही है। केवल भाषणबाजी से किसी समस्या का समाधान नहीं होगा।
इस तरह, विपक्ष के हमलों पर बीजेपी और जदयू के नेताओं ने अपनी बातें रखी हैं। उनका मानना है कि देश की सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था के लिए अवैध घुसपैठियों पर कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विपक्ष से अपील की है कि वे गलत लोगों के पक्ष में खड़े होने की बजाय देशहित में सोचें।
कुल मिलाकर, बिहार में इस मुद्दे पर राजनीतिक गरमा-गर्मी जारी है। भाजपा और एनडीए के नेता अपने तर्क रख रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे अलग नजरिए से देख रहा है। आगे की राजनीतिक गतिविधियां इस मुद्दे पर पूरे देश का ध्यान खींचेगी।