अमित शाह के बयान पर बिहार एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया, विपक्ष पर प्रहार
अमित शाह के बयान पर बिहार एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया, विपक्ष पर प्रहार
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पटना, 3 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि विपक्षी दल एसआईआर का विरोध केवल इसलिए कर रहे हैं क्योंकि अवैध घुसपैठिए उनके वोट बैंक हैं। इस पर बिहार के एनडीए नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। भाजपा नेता संजय सरावगी ने सवाल किया, "क्या कांग्रेस का पूरा अस्तित्व केवल रोहिंग्या और अवैध घुसपैठियों के फर्जी वोटों पर टिका है?" उन्होंने अमित शाह के बयान का समर्थन किया और कहा कि, "अमित शाह हर मंच से बार-बार यही बात कह रहे हैं लेकिन विपक्ष को न तो दिखाई दे रहा है और न ही सुनाई दे रहा है।"
संजय सरावगी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों में एसआईआर को सही बताया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, "कर्नाटक और केरल में कांग्रेस की ही सरकारें हैं। कर्नाटक में एक करोड़ नाम काटे गए हैं और वहां के वरिष्ठ मंत्री खुद कह रहे हैं कि हमारे यहां एसआईआर सही हुआ है। केरल के मंत्री भी यही कह रहे हैं लेकिन यही लोग दिल्ली में बैठकर हो-हल्ला कर रहे हैं।" सरावगी ने यह भी कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि तीन करोड़ फर्जी, मृत और अवैध घुसपैठियों के नामों को वोटर लिस्ट से हटाया गया है। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या कांग्रेस का पूरा अस्तित्व केवल रोहिंग्या और अवैध घुसपैठियों के फर्जी वोटों पर टिका है?"बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जो नेता देश की सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के बजाय विदेशी घुसपैठियों की ढाल बनकर खड़ा होगा, उसे 140 करोड़ भारतीय कभी भी देश का नेतृत्व नहीं सौंपेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में जिन लोगों के नाम काटे गए हैं, वे मृत थे, स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके थे या उनका नाम दो जगह दर्ज था। विपक्ष एक भी ऐसा व्यक्ति सामने नहीं ला सका जो कह सके कि वह जीवित मतदाता है या उसका नाम गलत तरीके से काटा गया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह विपक्ष द्वारा फैलाया जा रहा झूठा नैरेटिव है, जिसे देश की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।
इस बीच, बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने भी अमित शाह के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान स्पष्ट रूप से तीन करोड़ ऐसे लोग पाए गए जिन्होंने अवैध तरीके से देश में अपना नाम जुड़वाकर देश के संसाधनों का लाभ लिया। उन्होंने कहा, "खाएगा हमारा और गाएगा दूसरा, ऐसा नहीं चल सकता। कुछ विदेशी ताकतें घुसपैठियों के जरिए देश में अव्यवस्था फैलाने की कोशिश कर रही हैं।"
राम कृपाल यादव ने गृह मंत्री द्वारा घुसपैठियों की पहचान करने के काम की सराहना की। उन्होंने कहा कि उन पर सख्त नजर रखी जा रही है। वहीं, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा कि यह सवाल केवल राहुल गांधी या अमित शाह का नहीं है। यह सरकार के काम करने का है। उन्होंने कहा, "अगर कोई अवैध है और बाहर से आकर अपना नाम नोट करा लेता है, तो कहीं न कहीं यह आपके ही अधिकारियों और निर्वाचन से जुड़े लोगों की गलती है।"
उन्होंने सुझाव दिया कि जो गलत है, उसे काटना चाहिए और जो सही है, उसकी फिर से एंट्री करनी चाहिए। श्याम रजक ने कहा कि भाषण देकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि "सीधी सी बात है कि जो गलत है वह गलत है और जो सही है वह सही है। केवल भाषणबाजी से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।"
इस तरह से बिहार में एसआईआर पर चल रही बहस गहन होती जा रही है। सभी दलों के नेता इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विपक्ष इस मुद्दे पर कोई ठोस प्रतिक्रिया देगा या फिर यह मामला कुछ समय के लिए ठंडा हो जाएगा। बिहार में चल रही यह राजनीतिक बहस क्या किसी नई दिशा में जाएगी, यह तो भविष्य ही बताएगा।