नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में जितिन प्रसाद ने की सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की बात
नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में जितिन प्रसाद ने की सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की बात
NewsPoint•
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। नई दिल्ली में नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस चल रही है। यह कॉन्फ्रेंस बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां रणनीतिक निर्णय और संवाद होते हैं। यह कॉन्फ्रेंस 29 सितंबर को शुरू हुई थी और आज इसके अंतिम चरण को पूरा किया जा रहा है। इस कॉन्फ्रेंस में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद शामिल हुए। उन्होंने इस दौरान बताया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा में नौसेना का योगदान महत्वपूर्ण है। सरकार अब सेमीकंडक्टर और चिप उत्पादन में स्वराज्य बढ़ाने पर जोर दे रही है, ताकि संकट के समय टिकाऊ प्रौद्योगिकी तंत्र तैयार किया जा सके।
जितिन प्रसाद ने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में देश की सुरक्षा और तकनीकी क्षमता एक-दूसरे से तेजी से जुड़ रहे हैं। ऐसे में नई तकनीकों को तेजी से अपनाना और उन्हें देश की जरूरतों के अनुसार विकसित करना बेहद जरुरी है। उन्होंने कहा, "नई तकनीकों को केवल विकसित करना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि उन्हें तेजी से रक्षा क्षेत्र में शामिल किया जाए और उनका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।"इस दौरान, जितिन प्रसाद को नौसेना द्वारा नवाचार, स्वदेशीकरण और नई तकनीकों को अपनाने के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि तकनीकी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम प्रौद्योगिकी और अन्य नयी तकनीकों की उपयोगिता बढ़ती जा रही है। इन तकनीकों का महत्व केवल सामान्य तकनीकी क्षेत्र तक नहीं है, बल्कि यह रक्षा बलों के लिए भी जरूरी हो गया है।
केंद्रीय मंत्री ने रक्षा व्यापार में मौजूद अड़चनों और उभरती तकनीकों के संबंधों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, "सरकार इन नई तकनीकों को तेजी से और प्रभावी तरीके से अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।" उनका उद्देश्य एक ऐसी रक्षा व्यवस्था तैयार करना है जो अच्छी तरह सुसज्जित और आत्मनिर्भर हो। जितिन प्रसाद ने भारतीय नौसेना के नवाचार और स्वदेशीकरण के प्रयासों को महत्व दिया। उन्होंने बताया कि यह सब तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़े कदम हैं।
यह कॉन्फ्रेंस सिर्फ नौसेना कमांडरों के लिए नहीं, बल्क ि इसमें भारतीय सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने भी भाग लिया। यह बैठक नौसेना की संचालन तैयारियों के लिए सबसे बड़ा प्लेटफार्म है। इस दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने समुद्री सुरक्षा पर चर्चा की। उन्होंने भारतीय नौसेना की परिचालन स्थिति का मूल्यांकन किया। इस संदर्भ में, उन्होंने समुद्री क्षेत्र में मौजूदा और उभरती चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए उच्च स्तर की युद्धक तैयारी पे बल दिया।
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई करना और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बनाए रखना आवश्यक है। यह सुनिश्चित करने के लिए तकनीक को जल्दी अपनाना और सैन्य क्षमताओं का विकास करना भी जरूरी है। यह सभी बातें यह दर्शाती हैं कि भारतीय नौसेना अपने सर्वोत्तम स्तर पर कार्य कर रही है।
कुल मिलाकर, इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य भारतीय नौसेना को तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है। अंत में, जितिन प्रसाद ने पुनः जोर दिया कि नई तकनीकों का प्रयोग बहुत अहम है। यह सब मिलकर हमारी नौसेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है। और यही है इस कॉन्फ्रेंस का असली मोल। --आईएएनएस जीसीबी/एसके