भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता के विवादास्पद बयान पर एमएनएस ने की कड़ी प्रतिक्रिया

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Navbharat Times
महाराष्ट्र के भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता एक बार फिर विवादों में फंस गए हैं। 1 अक्टूबर को ठाणे में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने मीरा-भायंदर क्षेत्र को ‘जैन नगरी’ करार दिया। इस बयान पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने कड़ी आपत्ति जताई है। मेहता ने कहा, "मुझे गर्व है कि मैं ऐसे शहर से आता हूं, जिसे अक्सर ‘मिनी राजस्थान’ या ‘जैन नगरी’ कहा जाता है।" उन्होंने दावा किया कि मीरा-भायंदर में 33 से अधिक जैन मंदिर हैं और यहां संत-मुनियों का आना-जाना लगा रहता है। मीरा-भायंदर में जैन समुदाय से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने कहा, "जब भी जैन समुदाय से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं, हम मजबूती से उनके साथ खड़े रहते हैं।"

मेहता ने अपने स्कूल से जुड़े पुराने विवादों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि जैन पर्व पर्युषण के दौरान उनके स्कूल में बच्चों के लंच बॉक्स में कंद-मूल सब्जियां नहीं लाने का नियम लागू किया गया था। इस नियम के खिलाफ विवाद हुआ, लेकिन स्कूल ने अपने निर्णय को वापस लेने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही, मेहता ने जैन मुनियों के लिए सड़कों पर सफेद पट्टियों के निर्माण के विवाद का भी जिक्र किया।
इस पर एमएनएस की मीरा-भायंडर विधानसभा इकाई के अध्यक्ष सचिन पोपले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मेहता को "विभाजनकारी राजनीति" छोड़नी चाहिए। पोपले ने कहा, "मीरा-भायंदर को केवल किसी एक समुदाय से जोड़ना उचित नहीं है।" उन्होंने इसे कोली, आगरी और मराठी लोगों की भूमि बताया। पोपले ने स्कूल में कंद-मूल पर लगे प्रतिबंध पर भी निशाना साधा और कहा कि एमएनएस के विरोध के बाद स्कूल को अपना निर्देश वापस लेना पड़ा था। साथ ही, उन्होंने जैन मुनियों के लिए सफेद पट्टियों की चर्चा पर भी मेहता पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।

इससे पहले भी नरेंद्र मेहता कई विवादों में रह चुके हैं। सितंबर में, सेवन-इलेवन ग्रुप द्वारा संचालित सेवन स्क्वायर एकेडमी में पर्युषण के दौरान छात्रों के टिफिन में कंद-मूल सब्जियां न लाने के निर्देश को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद अभिभावकों की आपत्ति पर ये निर्देश वापस ले लिए गए थे। उस समय भी मेहता ने अपने स्कूल की नीतियों का बचाव किया था।

मेहता पर मीरा रोड-भायंदर इलाके में ‘दामोदर टावर’ परियोजना के ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) को लेकर आरोप लगे थे। जनहवी डेवलपर्स के साझेदार देवराम मांडोरा ने आरोप लगाया था कि ओसी जारी कराने के बदले उनसे परियोजना में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी और एक फ्लैट की मांग की गई। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस मामले में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और पुलिस को बिल्डर की ओर से उपलब्ध कराई गई ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच के निर्देश दिए थे।

हालांकि, मेहता ने इन आरोपों को खारिज किया और इन्हें मनगढ़ंत बताया। उन्होंने दावा किया कि बिल्डर डिफॉल्टर है और ऑडियो क्लिप पुरानी है और इसे चुनिंदा तरीके से संपादित किया गया था। बाद में, उस बिल्डर को एक ठेकेदार की ओर से दर्ज 1.06 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में मीरा रोड पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

इसके अतिरिक्त, मीरा-भायंदर में भूमि विवाद को लेकर मेहता से जुड़ी एक संस्था का नाम भी सामने आया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के परिचित असगर अली वोहरा ने भायंदर ईस्ट में एक विवादित जमीन के बारे में शिकायत की थी। उन्होंने नई दिल्ली में पीएम मोदी से अपनी शिकायत रखी थी। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई हुई और मेहता से जुड़ी संस्था ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ दिया। साथ ही, निर्माण संबंधी मंजूरियां भी वापस ले ली गईं।

इस पूरे मामले ने नरेंद्र मेहता की छवि को काफी प्रभावित किया है और एमएनएस के नेताओं ने उनकी नीतियों और बयानों की कड़ी आलोचना की है। अब देखना ये है कि क्या मेहता इस विवाद से उबरते हैं या फिर इससे उनकी राजनीतिक आकांक्षाएं प्रभावित होती हैं।