भारतीय बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पिच की संतुलन की कमी पर जताई निराशा
भारतीय बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पिच की संतुलन की कमी पर जताई निराशा
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गुवाहाटी, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 406 रन का विशाल लक्ष्य हासिल करके नया रिकॉर्ड स्थापित किया। इस सफलता के बाद भारतीय बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने बताया कि बरसापारा स्टेडियम की पिच गेंदबाजों के लिए बिलकुल भी फायदेमंद नहीं थी। कोटक ने कहा कि इस पिच पर बल्लेबाजों को बहुत लाभ मिला, जबकि गेंदबाजों के लिए रन रोकना और विकेट लेना बेहद कठिन था। उन्होंने बल्लेबाजी और गेंदबाजी के बीच संतुलन नहीं होने पर निराशा जताई।
दूसरे वनडे में भारत ने 39 गेंदें शेष रहते हुए 406 रन बना लिए। मैच में कुल 811 रन बने और इसमें पांच शतक लगे, जिसमें कप्तान शुभमन गिल का दोहरा शतक भी शामिल था। कोटैक ने कहा, "गेंदबाजों के लिए ज्यादा कुछ नहीं था। हम चाहते हैं कि यह बराबरी का मुकाबला हो। शायद 300 रन वाली पिच पर, दूसरी टीम को 300 या 320 रन बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती (जो आदर्श है)।" उन्होंने बताया कि आउटफील्ड तेज थी, जिससे बल्लेबाजी आसान हो गई, "वहां से 20, 30, 40 रन आसानी से बन गए। खासकर इस मैच में। हां, गेंदबाजों के लिए बुरा लगता है।"कोटक ने यह भी माना कि भारत वेस्टइंडीज को 400 से ज्यादा रन बनाने से रोक सकता था, लेकिन उन्होंने सीधे तौर पर पिच क्यूरेटर को दोष नहीं दिया। उन्होंने कहा, "देखिए, हम पिचों के बारे में बात करते रहते हैं। मगर मैं आपको बता दूं कि मुझे नहीं लगता कि दुनिया में कोई भी एकदम सही पिच बना सकता है। कोई भी ऐसी पिच नहीं बना सकता जिस पर सिर्फ 250 या 300 रन ही बनें। हो सकता है कि क्यूरेटर 250 या 300 रन वाला मैच बनाने की कोशिश करे और पिच पर ज्यादा स्पिन या सीम हो और टीम 150 रन पर ही आउट हो जाए। ऐसे में भी उसे आलोचना ही मिलेगी।"
कोटक ने 1983 वर्ल्ड कप की याद दिलाते हुए कहा कि वह समय में 60 ओवर में 180 रन बहुत ज्यादा माने जाते थे। आज की स्थिति में 400 रन भी कम महसूस होते हैं। उन्होंने सवाल किया कि "क्या इसके लिए सिर्फ पिच जिम्मेदार है या बल्लेबाजी का स्तर बेहतर हो गया है?" इसके जवाब में उन्होंने कहा, "जिस तरह से खिलाड़ी बल्लेबाजी कर रहे हैं, उस पर बहस हो सकती है।"
वेस्टइंडीज के बॉलिंग कोच रवि रामपॉल ने भी कोटक की बात से सहमति जताई। उन्होंने कहा, "ऐसी पिचों पर गलती की गुंजाइश बहुत कम होती है। आजकल हर जगह सपाट पिचें हैं। यह पिच और भी सपाट है और बल्लेबाजी के लिए ज्यादा अच्छी है, क्योंकि इसमें स्पिनरों या तेज गेंदबाजों के लिए कुछ भी नहीं है। जाहिर है कि जो अधिक रन बनाता है वही मैच जीतता है, और ऐसे हालात में गेंदबाजों के लिए बिना विकेट लिए मैच खत्म करना मुश्किल होता है।"
भारत का न्यूजीलैंड दौरा श्रीलंका और जिम्बाब्वे के साथ घरेलू वनडे सीरीज से पहले तय है। इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या बल्लेबाजी के लिए इतनी आसान पिचों पर खेलने से साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप 2027 से पहले सुरक्षा का एक झूठा एहसास हो सकता है। हालांकि कोटक को इस बात से कोई चिंता नहीं है। उन्हें बल्लेबाजों की कठिन पिचों के हिसाब से ढलने की क्षमता पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, "तैयारी की बात करें तो हम न्यूजीलैंड में पांच मैच खेलेंगे। मैं साउथ अफ्रीका जा चुका हूं। वहां की कुछ पिचें हमारे यहां के हालात जैसी ही होंगी।"
कोटक ने आगे कहा, "वे भी अच्छी पिचों पर खेलना चाहते हैं क्योंकि यदि आप व्हाइट-बॉल क्रिकेट में ऊंची-नीची पिचें देते हैं और मैच कम स्कोर वाला होता है, तो कोई भी ऐसा नहीं चाहेगा। इसी वजह से पिचें शायद 350 या 400 रन वाली न हों। स्कोर 300 या उससे ज्यादा हो सकता है। मगर यह हालात पर निर्भर करता है। इसी कारण हमें हर तरह के हालात के लिए तैयार रहना चाहिए।"
यह बयान खेल के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करता है और दिखाता है कि कैसे पिच के व्यवहार और बल्लेबाजी के स्तर के बीच संतुलन महत्वपूर्ण है।