केंद्र सरकार ने रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी की, किसानों को मिलेगा लाभकारी मूल्य

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Navbharat Times
केंद्र सरकार ने रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। यह फैसला 1 अक्टूबर को लिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को उपज का अच्छे दाम दिलाना और उनकी लागत के मुकाबले ज्यादा लाभ सुनिश्चित करना है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सूरजमुखी की फसल के लिए 675 रुपए प्रति क्विंटल की गई है। इसके बाद अन्य फसलों जैसे रेपसीड, सरसों, मसूर, जौ, चना और गेहूं के दाम में क्रमश: 413, 390, 136, 83 और 25 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। अब गेहूं का एमएसपी 2,610 रुपए, चना 5,958 रुपए, मसूर 7,390 रुपए और सरसों 6,613 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है।

इस फैसले पर किसानों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। ज्यादातर किसानों ने इस बढ़ोतरी का स्वागत किया है। हालांकि, कुछ किसानों का कहना है कि खेती का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसलिए एमएसपी में और भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। बस्ती के किसानों का मानना है कि इससे निश्चित रूप से उन्हें वित्तीय फायदा होगा। भले ही ये बढ़ोतरी उनकी अपेक्षाओं के अनुसार न हो, लेकिन गेहूं, सरसों, चना और अन्य रबी फसलों के दाम में वृद्धि उन्हें बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद दे रही है।
एक किसान ने कहा, "यदि सरकार इसी तरह समय-समय पर एमएसपी की समीक्षा करती रही और दलहनी फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी करती रही तो इन फसलों की खेती को प्रोत्साहन मिलेगा।" इससे फसल विविधीकरण में भी मदद मिलेगी और किसानों की आमदनी में सुधार होगा। किसानों ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के बारे में भी सकारात्मक टिप्पणियां की हैं। उनका कहना है कि यह योजना छोटे किसानों के लिए काफी सहायक है।

किसानों ने केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) को भी महत्वपूर्ण योजना बताया है। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें कृषि कार्यों के लिए आसानी से ऋण मिल सकेगा। उनका मानना है कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण कभी-कभी फसलें बर्बाद हो जाती हैं, जिनका बीमा लाभ उन्हें नहीं मिलता। किसानों का कहना है कि सरकार को ऐसी अवस्थाओं को भी बीमा में शामिल करने पर विचार करना चाहिए।

कृषि उपनिदेशक अशोक कुमार ने बताया कि रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी से किसानों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य बढ़ने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। कानपुर देहात के किसानों ने कहा कि खाद, डीजल, सिंचाई और मजदूरी का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में एमएसपी में यह बढ़ोतरी जरूरी थी। सरसों और मसूर जैसी फसलों के दाम बढ़ने से उनकी आय पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

एक किसान ने कहा, "एमएसपी बढ़ने से निश्चित रूप से कुछ लाभ होगा। यदि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलता है तो इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और खेती को अधिक सुरक्षित आजीविका के रूप में आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।"

किसानों ने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित किए गए समर्थन मूल्य से मंडियों में उनके लिए सौदेबाजी की स्थिति बेहतर होती है। चना और सरसों जैसी फसलों के लिए निर्धारित एमएसपी से उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद है। कुछ किसानों ने एमएसपी में बढ़ोतरी और किसान-केंद्रित योजनाओं को कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका मानना है कि बढ़ा हुआ समर्थन मूल्य किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

राजस्थान के चूरू जिले के किसानों ने भी इस बढ़ोतरी का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकार ने किसानों के हित में कई कदम उठाए हैं। रबी और अन्य फसलों के लिए एमएसपी की व्यवस्था से उन्हें अच्छी आय मिलेगी। जोधपुर के किसानों ने कहा कि पहले उन्हें स्थानीय बिचौलियों के पास अपनी फसलें बेचनी पड़ती थीं। इससे उन्हें अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिलता था। अब बढ़ोतरी के बाद उन्हें बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।

किसानों का मानना है कि एमएसपी में यह वृद्धि केवल उपज का मूल्य ही नहीं बढ़ाएगी। इससे खेती से जुड़े जोखिमों का भी सामना करने में मदद मिलेगी। उनका कहना है कि अगर सरकार समय-समय पर समर्थन मूल्य बढ़ाती रही और कृषि लागत का ध्यान रखे, तो उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है।

किसानों ने सुझाव दिया है कि केवल समर्थन मूल्य बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। खाद, बीज, डीजल, बिजली, सिंचाई और कृषि मशीनरी की लागत कम करने की दिशा में भी कदम उठाने चाहिए। खेती को लाभकारी बनाने के लिए समर्थन मूल्य के साथ-साथ अन्य समस्याओं का समाधान भी जरूरी है।

कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की एमएसपी बढ़ाने की यह पहल किसानों के लिए एक सकारात्मक कदम है। इससे उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद है और कृषि क्षेत्र में सुधार की संभावनाएं बढ़ी हैं।