कर्नाटक के Chief Minister शिवकुमार ने ईवीएम और वोट चोरी का आरोप लगाया, बीजेपी ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की

NewsPoint•
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बेंगलुरु में, एसआईआर और ईवीएम को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। इंडिया ब्लॉक के नेता चुनाव आयोग के मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस बीच, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 60-70 लाख वोटों की चोरी और ईवीएम हैकिंग का आरोप लगाया है। इस पर भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी सीटी रवि ने मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। उन्होंने कहा, “Chief Minister ने 60-70 लाख वोटों की चोरी का आरोप लगाया। उनके खिलाफ First Information Report दर्ज होनी चाहिए।”

सीटी रवि ने बताया कि मुख्यमंत्री ने ईवीएम हैकिंग के मामले में झूठे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फॉर्म-7 के कारण कुछ विधानसभा क्षेत्रों में नाम और नंबर की अनोखी स्थिति है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ईआरओ की है और हमारी शिकायत सही है तो नाम हटाए जाएंगे, वरना हमारी अपील को खारिज किया जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एफआईआर करने का अधिकार केवल ईआरओ के पास है, न कि पुलिस और कांग्रेस के पास।
सीटी रवि ने दावा किया कि, “शिकायत करना हमारा अधिकार है और हमने ऐसा किया है। सही और गलत का फैसला करने की जिम्मेदारी बीएलओ की होती है।” इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस के अन्य आरोपों पर यह सवाल उठाया कि "क्या प्रिंटेड फॉर्म देना अपराध होता है? क्या चुनाव आयोग ने सर्कुलर भेजा है कि फॉर्म प्रिंट में नहीं दिए जा सकते हैं?"

भाजपा नेता ने कहा कि उनका बुनियादी प्रयास यह है कि वे केवल अपनी आपत्ति जता रहे हैं। “अब तक फॉर्म-7 के माध्यम से 91 हजार आवेदन डाले हैं। सीएम शिवकुमार ने कहा कि 60 लाख वोटरों के नाम हटाए गए। कहां हैं 71 लाख?” उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनावी काम में एफआईआर डालने का काम पुलिस का नहीं है।

सीटी रवि ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करके भाजपा पर झूठे आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा, “इसके खिलाफ हम अपना संघर्ष जारी रखेंगे।”

इस प्रकार, कर्नाटक के राजनीतिक माहौल में ईवीएम और वोटर्स के नामों को लेकर चल रही राजनीति ने एक नई चर्चा छेड़ दी है। चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच यह तकरार आने वाले चुनावों में और भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।