हैवान फिल्म रिव्यू: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की दमदार परफॉर्मेंस, प्रियदर्शन का निर्देशन

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'हैवान': अक्षय कुमार और सैफ अली खान की ज़बरदस्त टक्कर, प्रियदर्शन का मास्टरस्ट्रोक

निर्देशक प्रियदर्शन की नई फिल्म 'हैवान' सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है, और यह फिल्म अपने दमदार कलाकारों, खासकर अक्षय कुमार और सैफ अली खान की ज़बरदस्त केमिस्ट्री के चलते चर्चाओं में है। यह साइकोलॉजिकल एक्शन क्राइम थ्रिलर 18 साल बाद इन दोनों बड़े सितारों को एक साथ लाती है। फिल्म की कहानी एक खतरनाक अपराधी परशुराम (अक्षय कुमार) और एक दृष्टिबाधित व्यक्ति श्याम (सैफ अली खान) के बीच की जंग है, जहाँ सिर्फ ताकत ही नहीं, बल्कि दिमाग, सूझबूझ और हिम्मत भी दांव पर लगी है। प्रियदर्शन ने अपनी 98वीं फिल्म में भावनाओं, रोमांच और तनाव का ऐसा संतुलन बनाया है कि दर्शक अंत तक सीट से बंधा रहता है। फिल्म की अवधि 2 घंटे 44 मिनट है, लेकिन यह कहीं भी बोझिल नहीं लगती। 'हैवान' को 4/5 की रेटिंग मिली है, जो इसके दमदार प्रदर्शन और निर्देशन का प्रमाण है।
अक्षय कुमार का डार्क अवतार और सैफ अली खान का संयम: फिल्म की जान

'हैवान' की सबसे बड़ी ताकत इसके दो मुख्य कलाकार हैं, जो कहानी में एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत खड़े नज़र आते हैं। एक तरफ अक्षय कुमार का खतरनाक और डर पैदा करने वाला किरदार है, तो दूसरी तरफ सैफ अली खान का शांत और समझदार अंदाज़। अक्षय कुमार ने इस फिल्म में अब तक की अपनी सबसे डार्क और सबसे खतरनाक परफॉर्मेंस में से एक दी है। वह विलेन के किरदार को ऊंची आवाज़ और ज़रूरत से ज़्यादा गुस्से के साथ पेश नहीं करते। इसके बजाय उनके किरदार में एक अजीब सी शांति है, जो उसे और ज़्यादा डरावना बनाती है। उनके चेहरे के एक्सप्रेशन, बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग बोलने का अंदाज़ देखकर परशुराम की अगली चाल का अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो जाता है। उनके अभिनय में मौजूद यह शांत खौफ फिल्म में एक टेंशन का एलिमेंट लगातार बनाए रखता है।

वहीं सैफ अली खान श्याम के किरदार में बेहद प्रभावी दिख रहे हैं। दृष्टिबाधित श्याम अचानक एक बेहद खतरनाक स्थिति में फंस जाता है और उससे निकलने के लिए उसे अपनी समझ, सुनने की क्षमता, आसपास की चीज़ों को महसूस करने की ताकत और हिम्मत पर भरोसा करना पड़ता है। सैफ इस किरदार की कमजोरी को ज़रूरत से ज़्यादा दिखाने की कोशिश नहीं करते। वह श्याम की समझदारी और जुझारूपन को भी सामने रखते हैं। खासकर अक्षय के साथ आमने-सामने वाले सीन में सैफ का संयम और अभिनय बेहद असरदार लगता है।

अक्षय और सैफ की भिड़ंत: दिमागी खेल और रोमांच का संगम

यही अक्षय और सैफ की भिड़ंत 'हैवान' का सबसे बड़ा आकर्षण है। दोनों के बीच होने वाला टकराव सिर्फ फिजिकल नहीं है, बल्कि दिमागी खेल भी है। परशुराम के पास ताकत, आत्मविश्वास और परिस्थितियों को अपने हिसाब से मोड़ने की क्षमता है, जबकि श्याम को हर कदम पर अपनी समझ और सहज बुद्धि का सहारा लेना पड़ता है। यही अंतर दोनों के सीन में रोमांच पैदा करता है। दर्शक लगातार यह जानने के लिए उत्सुक रहता है कि अगली चाल किसकी होगी। यह टकराव फिल्म को एक सामान्य नायक-विलेन की लड़ाई से ऊपर उठाकर एक दिमागी जंग का रूप देता है, जहाँ हर पल दांव पर लगा है।

पहल चौधरी का सरप्राइज परफॉरमेंस और सहायक कलाकारों का योगदान

फिल्म में पहल चौधरी एक बड़ा सरप्राइज बनकर सामने आती हैं। युवा कलाकार ने अपने किरदार को काफी आत्मविश्वास के साथ निभाया है। उनके अभिनय में मासूमियत और सच्चाई है। उनकी मौजूदगी कहानी में भावनात्मक जुड़ाव पैदा करती है और दर्शक को किरदारों के साथ जोड़ने में मदद करती है। बड़े कलाकारों के बीच भी वह अपनी अलग जगह बनाने में सफल रहती हैं।

सहायक कलाकारों ने भी फिल्म को मजबूती दी है। सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर और बोमन ईरानी अपने-अपने किरदारों में सहज और प्रभावी नज़र आते हैं। शारिब हाशमी पुलिस अधिकारी की भूमिका में कहानी के जांच वाले हिस्से को स्वाभाविक बनाए रखते हैं। वहीं दिवंगत अभिनेता असरानी का अभिनय भी दिल छूता है और याद रह जाता है। स्क्रीन पर उनका आखिरी बार दिखना उनकी मौजूदगी को और भी इमोशनल अहमियत देता है।

प्रियदर्शन का निर्देशन: भावनाओं और रोमांच का परफेक्ट बैलेंस

प्रियदर्शन एक बार फिर साबित करते हैं कि उन्हें कमर्शियल सिनेमा की नब्ज़ अच्छी तरह समझ आती है। 'हैवान' उनके करियर की 98वीं फिल्म है और इसमें वह भावनाओं, रोमांच, तनाव और मनोरंजन के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखते हैं। फिल्म की लंबाई 2 घंटे 44 मिनट है, लेकिन ऐसा कम ही लगता है कि कहानी को बेवजह खींचा जा रहा है। परफॉरमेंस, टकराव और थ्रिलर का लगातार आगे बढ़ना कहानी को आगे बढ़ाता है।

बैकग्राउंड म्यूजिक और संगीत: माहौल को और भी दमदार बनाते हैं

फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक भी इसके माहौल को बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाता है। खासकर टकराव वाले सीन में संगीत तनाव को और बढ़ाता है और दर्शक को अगले पल के लिए तैयार करता है। यह संगीत कलाकारों के अभिनय पर हावी नहीं होता, बल्कि सीन के प्रभाव को बढ़ाता है। प्रीतम का संगीत भी कहानी के साथ जुड़ा हुआ महसूस होता है। 'मेरे हीरो है वो' भावनात्मक असर पैदा करता है, जबकि 'रंगियारा' यात्रा वाले हिस्सों में अच्छी तरह बैठता है। गाने फिल्म के माहौल को थोड़ा हल्का करने के साथ-साथ जुड़े रहते हैं।

'ओप्पम' का हिंदी रूपांतरण: नई ऊर्जा और व्यावसायिक रंग

'हैवान' प्रियदर्शन की मलयालम थ्रिलर 'ओप्पम' का हिंदी रूपांतरण है। मूल फिल्म से परिचित दर्शक इसकी कहानी से अनजान नहीं होंगे, लेकिन हिंदी रूपांतरण को अलग अंदाज़, प्रस्तुति और व्यावसायिक रंग देने की कोशिश की गई है। कलाकारों का अभिनय कहानी में नई ऊर्जा भरता है। वहीं मोहनलाल की स्पेशल अपीयरेंस, जिसमें वह मूल फिल्म की अपनी मौजूदगी को दोहराते हैं, 'ओप्पम' देखने वाले दर्शकों के लिए खास आकर्षण है और दोनों फिल्मों के बीच एक खूबसूरत कड़ी बनाती है।

निष्कर्ष: एक मज़ेदार थ्रिलर, जो दर्शकों को बांधे रखती है

कुल मिलाकर 'हैवान' अपने ज़रूरी हिस्सों को सही तरीके से जोड़ने में सफल रहती है। अक्षय कुमार का किरदार परशुराम खौफ पैदा करता है, सैफ अली खान का श्याम कहानी को इंसानी भावनाओं से जोड़ता है और पहल चौधरी एक शानदार अंदाज़ में सामने आती हैं। सहायक कलाकार कहानी को मजबूती देते हैं, जबकि प्रियदर्शन रोमांच और भावनाओं का संतुलन बनाए रखते हैं। 'हैवान' एक ऐसी थ्रिलर है, जिसमें उसके सबसे ज़रूरी हिस्से सही जगह पर काम करते हैं। अक्षय कुमार को अपने करियर का एक बेहद दमदार नकारात्मक किरदार मिला है, सैफ अली खान ने चुनौतीपूर्ण भूमिका को गहराई और संयम के साथ निभाया है और पहल चौधरी ने अपनी मौजूदगी से चौंकाया है। लेकिन फिल्म की असली जान अक्षय और सैफ की भिड़ंत है। प्रियदर्शन का निर्देशन इस टकराव के तनाव को बनाए रखता है और रोमांच, भावना, ड्रामा और बड़े पर्दे के मनोरंजन को एक साथ लेकर चलता है। कहानी भले ही पहले से जानी-पहचानी ज़मीन पर खड़ी हो, लेकिन कलाकारों का अभिनय, फिल्म का माहौल और इसका प्रस्तुतीकरण इसे एक अच्छा सिनेमाई अनुभव बना देता है। यह फिल्म निश्चित रूप से दर्शकों को अपनी सीट से बांधे रखने में कामयाब होती है।