जंतर मंतर प्रदर्शन: छात्र को 5 लाख के मुचलके का नोटिस, Si निलंबित, पुलिस की भूमिका जांच के दायरे में
जंतर-मंतर प्रदर्शन: छात्र को 5 लाख के मुचलके का नोटिस, SI निलंबित, पुलिस की भूमिका जांच के दायरे में
NewsPoint•
नोएडा, 11 सितंबर (आईएएनएस)। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने के बाद गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को पांच लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस भेजे जाने के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। छात्र के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार करने वाले ईकोटेक-1 थाने के सब इंस्पेक्टर शिवा पांडेय को निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में अन्य पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच चल रही है। एडीसीपी स्तर पर हुई शुरुआती जांच के बाद यह निलंबन हुआ है और विभागीय जांच अभी जारी है।
यह पूरा मामला तब गरमाया जब चार सितंबर को कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने अक्षत त्रिपाठी को एक नोटिस भेजा। इस नोटिस में उनसे कहा गया था कि वे शांति बनाए रखने के लिए छह महीने के लिए पांच लाख रुपये का निजी बांड भरें और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करें। यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की संबंधित धाराओं के तहत शुरू की गई एक प्रक्रिया का हिस्सा थी।पुलिस की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में अक्षत त्रिपाठी पर आरोप लगाया गया था कि वे विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे। साथ ही, उन पर सरकार विरोधी और भ्रामक बातें फैलाने का भी आरोप था। पुलिस को आशंका थी कि उनकी इन हरकतों से विश्वविद्यालय परिसर में तनाव फैल सकता है और कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
यह रिपोर्ट ईकोटेक-1 थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर शिवा पांडेय ने तैयार की थी। रिपोर्ट को थाना प्रभारी के माध्यम से आगे भेजा गया था। हालांकि, अक्षत त्रिपाठी ने पुलिस के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस समय उनके खिलाफ यह रिपोर्ट तैयार की गई, उस समय वे विश्वविद्यालय में मौजूद ही नहीं थे।
अक्षत त्रिपाठी ने यह भी बताया कि वे काफी समय से विश्वविद्यालय की कक्षाओं में नहीं जा रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्षत ने यह भी कहा कि जुलाई के महीने में वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में इंटर्नशिप कर रहे थे।
जब पांच लाख रुपये के इस नोटिस को लेकर सवाल उठने लगे तो मामला और भी गंभीर हो गया और यह सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट में इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए। रिपोर्टों के मुताबिक, शीर्ष अदालत ने यह भी पूछा कि जब प्रदर्शन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पहले से ही स्पष्ट निर्देश मौजूद थे, तो फिर संबंधित अधिकारी ने यह नोटिस कैसे जारी कर दिया।
विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने अक्षत त्रिपाठी को जारी किया गया पांच लाख रुपये के मुचलके वाला नोटिस वापस ले लिया। पुलिस की ओर से यह बताया गया कि जैसे ही यह मामला उनके संज्ञान में आया, संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई और नोटिस को तुरंत रद्द कर दिया गया। इसके बाद, पुलिसकर्मियों की भूमिका की विभागीय जांच शुरू की गई।
इस मामले में गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने यह भी साफ किया कि जिलाधिकारी मेधा रूपम की ओर से छात्र के खिलाफ धारा 130 के तहत कोई आदेश जारी नहीं किया गया था। दरअसल, कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया पुलिस की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर कार्यपालक मजिस्ट्रेट के स्तर से नोटिस जारी होने तक चली थी।
अब सब इंस्पेक्टर शिवा पांडेय के निलंबन के बाद, इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया और तेज हो गई है। पुलिस विभाग उन अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रहा है, जिन्होंने रिपोर्ट तैयार की और नोटिस जारी होने से पहले तथ्यों का सत्यापन किया। पुलिस विभाग का कहना है कि जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह निलंबन इस बात का संकेत है कि पुलिस विभाग इस तरह की गलतियों को बर्दाश्त नहीं करेगा और जवाबदेही तय की जाएगी। यह मामला दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी गलती या प्रक्रियात्मक चूक बड़े विवाद का रूप ले सकती है और अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।