भारत ने 80 लाख एचपीवी टीकाकरण का आंकड़ा पार किया, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी जानकारी

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नई दिल्ली, 11 सितंबर: भारत ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। देश में 80 लाख से ज़्यादा एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीके लगाए जा चुके हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक्स (पहले ट्विटर) पर यह जानकारी साझा की है। मंत्रालय ने कहा कि यह उपलब्धि निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने और एचपीवी संक्रमण व उससे जुड़े कैंसर से सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम है। हर टीके के साथ, भारत अपनी बेटियों के लिए एक स्वस्थ, कैंसर-मुक्त भविष्य की ओर बढ़ रहा है।

एचपीवी वैक्सीन एक सुरक्षित और बहुत असरदार टीका है। यह उन संक्रमणों को रोकता है जो सर्वाइकल कैंसर, गुदा (एनल) और गले के कैंसर के साथ-साथ जननांगों पर मस्से का कारण बनते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यह वैक्सीन हाई-रिस्क एचपीवी स्ट्रेन से बचाती है, जो 90% तक सर्वाइकल कैंसर के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। यह लंबे समय तक सुरक्षा देती है और कैंसर से पहले होने वाले सेल बदलावों को भी रोकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैक्सीन 9 से 14 साल की उम्र की लड़कियों के लिए सबसे ज़्यादा असरदार है। इस उम्र में आमतौर पर दो खुराक की ज़रूरत होती है। भारत के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत, सिंगल-डोज अप्रोच भी अपनाई जा रही है। वहीं, 15 से 26 साल और कुछ हद तक 45 साल तक के वयस्कों को कैच-अप के तौर पर तीन खुराक दी जाती हैं, जो छह महीने के अंदर पूरी की जाती हैं। बड़ी उम्र के किशोरों और वयस्कों को भी इसका फायदा मिलता है, लेकिन सबसे अच्छा असर वायरस के संपर्क में आने से पहले होता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया भर में हुई व्यापक निगरानी से यह साबित हुआ है कि यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इससे कोई लंबी अवधि की स्वास्थ्य समस्या नहीं होती। इसके कुछ सामान्य हल्के साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, लालिमा या सूजन, हल्का बुखार, सिरदर्द या थकान। ये लक्षण कुछ समय में अपने आप ठीक हो जाते हैं।

एचपीवी संक्रमण एक आम यौन संचारित संक्रमण है जो कई तरह के कैंसर का कारण बन सकता है। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसर में से एक है, और एचपीवी इसका मुख्य कारण है। एचपीवी वैक्सीन इस गंभीर बीमारी से बचाव का एक प्रभावी तरीका है। भारत सरकार द्वारा इस टीकाकरण अभियान को बढ़ावा देना देश की महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यह टीकाकरण कार्यक्रम न केवल कैंसर के खतरे को कम करता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले बोझ को भी कम करने में मदद करता है। 80 लाख से ज़्यादा टीकाकरण का आंकड़ा यह दिखाता है कि देश इस दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि देश के स्वास्थ्य ढांचे की मज़बूती और निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर बढ़ते ज़ोर का प्रमाण है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि अधिक से अधिक लोग इस जीवन रक्षक टीके के बारे में जानें और इसका लाभ उठाएं।