उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' कहने पर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद विवादों में, भाजपा ने साधा निशाना
उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' कहने पर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद विवादों में, भाजपा ने साधा निशाना
NewsPoint•
बेंगलुरु, 16 सितंबर: कर्नाटक में राजनीतिक पारा उस वक्त चढ़ गया जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' करार दिया। इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने कांग्रेस पर देश को तोड़ने वालों का साथ देने का आरोप लगाया है। हरिप्रसाद का यह बयान तब आया जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन का विरोध किया था। हरिप्रसाद ने एबीवीपी को उमर खालिद के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं होने की बात कही थी। यह डॉक्यूमेंट्री नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) में दिखाई जानी थी, लेकिन एबीवीपी के विरोध के बाद इसे टाल दिया गया। कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियंक खड़गे ने भी इस मामले में सवाल उठाए हैं और पूछा है कि उमर खालिद को किस आधार पर 'राष्ट्रविरोधी' कहा जा रहा है। उन्होंने उमर खालिद के लंबे समय से जेल में होने और मुकदमे की सुनवाई न होने पर भी चिंता जताई है। समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने भी उमर खालिद का बचाव करते हुए कहा कि वे हमेशा राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द की बात करते रहे हैं।
कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' बताकर राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा नेता और कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने कांग्रेस नेता के इस बयान की कड़ी आलोचना की है। नारायणस्वामी ने कहा कि कांग्रेस उन लोगों का समर्थन करती है जो भारत को बांटने और टुकड़े-टुकड़े करने की बात करते हैं। उन्होंने कहा, "यही वजह है कि वह (हरिप्रसाद) उन्हें राष्ट्रवादी कहते हैं।"यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब एबीवीपी ने उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन का विरोध किया। हरिप्रसाद ने एबीवीपी के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "उमर खालिद एक राष्ट्रवादी हैं। एबीवीपी को उनके बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं है।" यह डॉक्यूमेंट्री नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) की लॉ एंड सोसाइटी कमेटी द्वारा दिखाई जानी थी। इसका प्रदर्शन 14 सितंबर को होना था, लेकिन एबीवीपी के विरोध के बाद इसे स्थगित कर दिया गया।
कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियंक खड़गे ने भी इस विवाद पर अपनी बात रखी। उन्होंने सवाल उठाया कि उमर खालिद को 'राष्ट्रविरोधी' किस आधार पर कहा जा रहा है। खड़गे ने उमर खालिद के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "उमर खालिद को राष्ट्रविरोधी कौन कह रहा है? क्या अदालत ने ऐसा कहा है? भाजपा उन्हें राष्ट्रविरोधी बता रही है।" खड़गे ने आगे कहा, "उनके मामले में सुनवाई क्यों नहीं हो रही? वह कई वर्षों से जेल में हैं और उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की गई है। फिर मुकदमे की सुनवाई आगे क्यों नहीं बढ़ रही? आखिर मुकदमा चलाने से डर किस बात का है?"
समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने भी उमर खालिद का बचाव करते हुए कहा कि उनके अनुसार खालिद हमेशा राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द की बात करते रहे हैं। हसन ने कहा, "जहां तक हमारी समझ है, उमर खालिद हमेशा राष्ट्रीय एकता की बात करते रहे हैं। उन्होंने हमेशा सांप्रदायिक सद्भाव और उत्पीड़न से मुक्ति की बात की है। हमें समझ नहीं आता कि उन्हें राष्ट्रविरोधी कैसे कहा जा रहा है।" उन्होंने आगे कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह छह साल से जेल में हैं और अभी तक उनका मुकदमा शुरू नहीं हुआ है। इसे रोक कौन रहा है, यह सभी जानते हैं।"