गैंगस्टर काला जठेड़ी को मानवीय आधार पर 7 घंटे की कस्टडी पैरोल मंजूर, जुड़वां बेटियों के धार्मिक समारोह में होंगे शामिल

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द्वारका कोर्ट ने गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी को मानवीय आधार पर बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने उसे 7 घंटे की कस्टडी पैरोल मंजूर की है. इसके तहत, काला जठेड़ी 20 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक पुलिस की निगरानी में अपने गांव जठेड़ी, सोनीपत, हरियाणा जा सकेगा. यह पैरोल उसे अपनी जुड़वां बेटियों के जन्म के बाद होने वाले धार्मिक समारोहों में शामिल होने के लिए दी गई है. ये दोनों बेटियां आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक से पैदा हुई हैं. फिलहाल काला जठेड़ी दिल्ली की सेंट्रल जेल में बंद है. कोर्ट ने दिल्ली और हरियाणा पुलिस को पैरोल के दौरान सुरक्षा और अन्य जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने साफ किया है कि तय समय के बाद उसे वापस जेल लाया जाएगा.

यह पहली बार नहीं है जब काला जठेड़ी को मानवीय आधार पर पैरोल मिली है. इससे पहले 30 जून को रोहिणी कोर्ट ने भी उसे 4 घंटे की कस्टडी पैरोल दी थी. तब यह पैरोल उसे अपनी पत्नी और नवजात जुड़वां बेटियों से मिलने के लिए दी गई थी. उस समय कोर्ट ने अस्पताल और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच के बाद बच्चों के जन्म और उनके इलाज की पुष्टि होने पर ही यह राहत दी थी. काला जठेड़ी की पत्नी अनुराधा चौधरी ने आईवीएफ प्रक्रिया से जुड़वां बेटियों को जन्म दिया था. प्रसव के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने के कारण सी-सेक्शन से डिलीवरी करनी पड़ी थी.
यह भी बता दें कि काला जठेड़ी ने 12 मार्च 2024 को लेडी डॉन अनुराधा चौधरी से शादी की थी. उस वक्त भी उसे शादी में शामिल होने के लिए कोर्ट से कस्टडी पैरोल मिली थी. तब उसकी सुरक्षा के लिए भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे.

काला जठेड़ी हरियाणा के सोनीपत जिले के जठेड़ी गांव का रहने वाला है. उसके खिलाफ दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में हत्या, रंगदारी, फिरौती और जमीन कब्जाने जैसे 30 से ज्यादा गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. फिलहाल, कोर्ट से मिली कस्टडी पैरोल के तहत वह अपनी जुड़वां बेटियों से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हो सकेगा. आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) एक ऐसी मेडिकल प्रक्रिया है जिसमें महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु को शरीर के बाहर प्रयोगशाला में निषेचित किया जाता है और फिर भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है. यह उन लोगों के लिए बच्चे पैदा करने का एक तरीका है जिन्हें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में कठिनाई होती है.