मद्रास हाईकोर्ट का निर्देश: पूर्व मंत्री एस.पी. वेलुमणि के टेंडर अनियमितता मामले में दो IAS अधिकारियों पर अभियोजन की मंजूरी दो महीने में पूरी हो

NewsPoint
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चेन्नई, 16 सितंबर: मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व अन्नाद्रमुक मंत्री एस.पी. वेलुमणि के खिलाफ टेंडर घोटाले के मामले में दो आईएएस अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने की प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी करने का आदेश केंद्र सरकार को दिया है. कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि वह अपने फैसले की जानकारी तमिलनाडु सरकार को भी दे. यह फैसला न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश ने अरप्पोर इयक्कम की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया. याचिका में कहा गया था कि डीवीएसी (सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय) के उस आदेश को लागू नहीं किया गया, जिसमें मामले में चार्जशीट दाखिल करने को कहा गया था. यह मामला एस.पी. वेलुमणि के मंत्री रहते हुए चेन्नई और कोयंबटूर नगर निगमों में टेंडर देने में हुई गड़बड़ियों से जुड़ा है. आरोप है कि इन टेंडरों में करीब 98.25 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ.

सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने 22 जुलाई को केंद्र सरकार को एक पत्र भेजकर दो आईएएस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी के बारे में स्पष्टीकरण मांगा था. बुधवार को जब मामले की दोबारा सुनवाई हुई, तो न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश ने केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के संयुक्त सचिव सुशील कुमार पाटिल से इस देरी के बारे में सवाल पूछे. सुशील कुमार पाटिल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए थे. पाटिल ने बताया कि इस मामले में बहुत सारे दस्तावेज हैं, जिनकी जांच के लिए उन्हें और समय चाहिए. उन्होंने यह भी बताया कि ये दस्तावेज केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को भेजे गए हैं और अगले हफ्ते तक वहां से जवाब आने की उम्मीद है. इसके बाद, ये दस्तावेज प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजे जाएंगे, जिसके पास मुकदमा चलाने की मंजूरी देने का अधिकार है.
केंद्र सरकार के अधिकारी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि यह पूरी प्रक्रिया करीब दो महीने में पूरी हो जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि अब और देरी नहीं होगी और मंजूरी की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा. केंद्र सरकार के इस जवाब को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने उसे एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. इस हलफनामे में नवंबर 2025 से अब तक मंजूरी की प्रक्रिया में उठाए गए कदमों का पूरा ब्योरा देना होगा. कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह भी साफ निर्देश दिया कि वह दो आईएएस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने की प्रक्रिया दो महीने के अंदर पूरी करे और अपने फैसले की जानकारी तमिलनाडु सरकार को दे. इस मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी.

यह मामला पूर्व अन्नाद्रमुक मंत्री एस.पी. वेलुमणि के कार्यकाल से जुड़ा है. उन पर आरोप है कि जब वे मंत्री थे, तब चेन्नई और कोयंबटूर नगर निगमों में टेंडर देने में भारी गड़बड़ी हुई. इस गड़बड़ी से सरकारी खजाने को करीब 98.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इस मामले की जांच डीवीएसी कर रही है. डीवीएसी ने चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया था, लेकिन कुछ अड़चनों के कारण यह प्रक्रिया रुकी हुई थी.

अदालत ने इस मामले में हो रही देरी पर चिंता जताई. न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश ने केंद्र सरकार के अधिकारी से सीधे सवाल पूछे कि आखिर मंजूरी मिलने में इतनी देर क्यों हो रही है. अधिकारी ने बताया कि दस्तावेजों की जांच में समय लग रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की मंजूरी जरूरी है, जिसमें समय लगता है.

अरप्पोर इयक्कम नाम के एक संगठन ने इस मामले में अवमानना याचिका दायर की थी. उनका कहना था कि कोर्ट के आदेश के बावजूद डीवीएसी चार्जशीट दाखिल नहीं कर पा रही है. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को यह अहम निर्देश दिया है. कोर्ट का यह फैसला भ्रष्टाचार के मामलों में तेजी लाने और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार दो महीने के अंदर इस प्रक्रिया को कितनी जल्दी पूरा करती है.