विदेश मंत्री एस. जयशंकर का रायपुर दौरा: आईआईएम दीक्षांत समारोह में वैश्विक व्यवस्था पर दिया संबोधन

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रायपुर में आईआईएम दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया बदल रही है और भारत ने चुनौतियों का सामना किया है। पिछले दस साल बेहतर रहे हैं, जिससे भविष्य के प्रति आशावाद बढ़ा है। भारत अब शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। समावेशी विकास और नेतृत्व ने नई नींव रखी है।

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रायपुर, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर शनिवार सुबह रायपुर पहुंचे, जहाँ शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। वे नवा रायपुर स्थित आईआईएम (भारतीय प्रबंधन संस्थान) के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि दुनिया में बड़े बदलाव हो रहे हैं और भारत ने इन चुनौतियों का डटकर सामना किया है। उन्होंने भारत के आशावाद और पिछले एक दशक में आई तरक्की पर भी प्रकाश डाला, जिससे भविष्य के प्रति उम्मीद जगी है।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आईआईएम रायपुर के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया एक बड़े उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है, जो कई मायनों में बहुत गहरी है। उन्होंने बताया कि वैश्विक व्यवस्था हमारी आँखों के सामने बदल रही है। इसमें देशों की ताकत और दुनिया में शक्ति का संतुलन भी साफ तौर पर बदलता दिख रहा है।
डॉ. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि हाल के दिनों में दुनिया भर में आई कई मुश्किलों ने हमारी सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा ली है। लेकिन भारत ने इन सभी मुश्किलों का मजबूती से सामना किया है। उन्होंने कहा कि हमने देश के अंदर और बाहर, दोनों जगह की चुनौतियों का काफी हद तक सफलतापूर्वक सामना किया है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत में एक ऐसा आशावाद है जो दुनिया के कई दूसरे हिस्सों में देखने को नहीं मिलता। जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों है, तो उन्होंने बताया कि पिछले 10 साल काफी बेहतर रहे हैं। इस वजह से यह भरोसा पैदा हुआ है कि आने वाले 10 साल और उसके बाद का समय भी बेहतर ही होगा। उन्होंने गर्व से कहा कि अब हम दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुके हैं।

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि ज्यादा समावेशी विकास, लोगों की भागीदारी वाली राजनीति और मजबूत नेतृत्व ने एक नई नींव रखी है। इस मजबूत नींव पर खड़े होकर अब हम सभी और भी बड़ी उम्मीदें रख सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत ने सिर्फ डिजिटल क्रांति को पूरे उत्साह से नहीं अपनाया है, बल्कि इसे अपने जीवन में एक खास मकसद के साथ लागू भी किया है। उन्होंने कहा कि कई विकसित देशों ने भी ऐसा नहीं किया है। शायद यह 'कुछ कर दिखाने की भावना' का भी एक नया जागरण है।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि हाल ही में दुनिया भर में आई कई मुश्किलों ने हमारी सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा ली है और भारत ने इन सभी का मजबूती से सामना किया है। उन्होंने दोहराया कि हमने देश के अंदर और बाहर, दोनों जगह की चुनौतियों का काफी हद तक सफलतापूर्वक सामना किया है।

उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत में एक ऐसा आशावाद है जो दुनिया के कई दूसरे हिस्सों में देखने को नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि पिछले 10 साल काफी बेहतर रहे हैं, जिससे यह भरोसा जगा है कि अगले 10 साल और उसके बाद का समय भी बेहतर ही होगा। उन्होंने कहा कि अब हम दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुके हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि ज्यादा समावेशी विकास, प्रतिनिधि राजनीति और निर्णायक नेतृत्व ने एक नई नींव रखी है, जिस पर खड़े होकर अब हम सभी और भी ऊंची आकांक्षाएं पाल सकते हैं। उन्होंने बताया कि हमने न सिर्फ डिजिटल क्रांति को पूरे उत्साह के साथ अपनाया है, बल्कि असल में इसे अपने जीवन में एक मकसद के साथ लागू भी किया है। उन्होंने कहा कि यहाँ तक कि कई विकसित समाजों ने भी ऐसा नहीं किया है। शायद यह 'कर दिखाने की भावना' का भी एक जागरण है।

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